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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Kaal Bhairav Jayanti 2022 Date on 16 November Puja Vidhi Do These Upay to Fulfill Every Wish

Kaal Bhairav Jayanti 2022 : जानिए भगवान कालभैरव की महिमा और इन्हें प्रसन्न करने के उपाय

Wed, 16 Nov 2022 07:53 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 16 Nov 2022 07:53 AM IST
सार

काल भैरवजी की पूजा आदि करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति प्राप्त होती है। इतना ही नहीं इनकी पूजा करने से ग्रह बाधा और शत्रु बाधा दोनों से ही मुक्ति मिलती है।

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Kaal Bhairav Jayanti 2022 Date on 16 November Puja Vidhi Do These Upay to Fulfill Every Wish
Kaal Bhairav Jayanti 2022: सभी शक्तिपीठों के पास भैरव के जागृत मंदिर जरूर होते हैं। इनकी उपासना के बिना देवी मां की उपासना अधूरी मानी जाती है। - फोटो : istock

विस्तार

आज यानी 16 नवंबर 2022 को काल भैरव जयंती है।  शास्त्रों के अनुसार भगवान काल भैरव का अवतरण मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इस दिन मध्याह्न में भगवान शिवशंकर के अंश से इनकी उत्पत्ति हुई थी जिन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। महादेव के रूद्र रूप कालभैरव को तंत्र का देवता माना गया है,इसलिए तंत्र-मंत्र की साधना निर्विघ्न संपन्न करने के लिए सबसे पहले काल भैरव की पूजा की जाती है। कालभैरव शत्रुओं और संकट से भक्तों की रक्षा करते हैं। सभी शक्तिपीठों के पास भैरव के जागृत मंदिर जरूर होते हैं। इनकी उपासना के बिना देवी मां की उपासना अधूरी मानी जाती है।   

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भगवान भैरव की महिमा
हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है। इन्हें काशी के कोतवाल भी कहा जाता है। इनकी  शक्ति का नाम है 'भैरवी गिरिजा 'जो अपने उपासकों की अभीष्ट दायिनी हैं। इनके दो स्वरूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है। ऐसी भी मान्यता  है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है। भैरव, शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं। सच्चे मन से जो भी इनकी उपासना करता है,उसकी सुरक्षा का भार ये स्वयं उठाते हैं और अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। साथ ही भैरवजी की पूजा से भूत-प्रेत,नकारात्मक शक्तियां और ऊपरी बाधा आदि जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।
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ऐसे करें काल भैरव को प्रसन्न
इस दिन काल भैरवजी की पूजा आदि करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति प्राप्त होती है। इतना ही नहीं इनकी पूजा करने से ग्रह बाधा और शत्रु बाधा दोनों से ही मुक्ति मिलती है। इनकी अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी के दिन से भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान काल भैरव को काले तिल,उड़द और सरसों का तेल का दीपक अर्पित करना चाहिए साथ ही मंत्रों के जाप के साथ ही उनकी विधिवत पूजा करने से वह प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

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