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Jyeshtha Purnima 2024: 21 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा, जानिए पूजाविधि और महत्व
Wed, 19 Jun 2024 12:32 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 19 Jun 2024 12:32 PM IST
सार
पूर्णिमा पर लक्ष्मी-नारायण व्रत करने का बहुत महत्व है। भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी सांसारिक दुखों का नाश होता है और सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, व्रत एवं दान-पुण्य करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
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Jyeshtha Purnima 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Jyeshtha Purnima 2024: वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 21 जून, 2024 को सुबह 06 बजकर 01 मिनट पर होगी, वहीं इसका समापन 22 जून 2024 को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में ज्येष्ठ पूर्णिमा 22 जून, शनिवार के दिन मनाई जाएगी, लेकिन इसका व्रत 21 जून को किया जाएगा। इस दिन वट पूर्णिमा व्रत और संत कबीर दास जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।
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पूर्णिमा व्रत का महत्व
पूर्णिमा पर लक्ष्मी-नारायण व्रत करने का बहुत महत्व है। भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी सांसारिक दुखों का नाश होता है और सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, व्रत एवं दान-पुण्य करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। इस दौरान चंद्रमा से जुड़ी चीजों का दान करने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। आप सफेद वस्त्र, शक्कर, चावल, दही या फिर चांदी का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव अपनी पूर्ण कला से युक्त होते हैं जिसका प्रभाव सीधे व्यक्ति के मन और शरीर पर पड़ता है। इस दिन चंद्र पूजन से व्यक्ति की मानसिक और आर्थिक स्थिति ठीक होती है क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा को द्रव्य और मन का कारक कहा गया है।
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पूर्णिमा व्रत की पूजाविधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उगते सूर्य को जल दें और इसके बाद भगवान लक्ष्मी नारायण के सामने हाथ में अक्षत, जल, पूजा की सुपारी और जल लेकर व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए पूर्व की ओर मुख कर बैठ जाएं और एक चौकी पर लाल और पीला वस्त्र बिछा कर लक्ष्मी-नारायण को आसन दें। पीला कपड़ा दाहिनी ओर बिछा कर विष्णु जी को स्थापित करें और लाल कपड़ा बाएं ओर बिछा का देवी लक्ष्मी को विराजित करें।
इसके बाद लाल, सफेद और पीले पुष्प अर्पित करते हुए विधि-विधान से पूजन करें। संभव हो तो देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें। इसके बाद मखाने की खीर,आटे की पंजीरी या शुद्ध घी से बने मिष्ठान्न का भोग लगाएं। आरती के बाद लक्ष्मीनारायण व्रत की कथा श्रवण या वाचन करें। पूर्णिमा तिथि पर व्रत रखकर विधिवत विष्णु जी का पूजन करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह तिथि मां लक्ष्मी को भी अत्यंत प्रिय होती है, इसलिए इस दिन श्री हरि के साथ लक्ष्मी पूजन करने से दरिद्रता का नाश होता है।धार्मिक मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से मनुष्य की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस व्रत को करने से धन, संपत्ति, सुख, वैभव में वृद्धि होती है। इस व्रत को गृहस्थ ही नहीं, अविवाहितों को भी करना चाहिए, इससे उन्हें सुयोग्य जीवन साथी की प्राप्ति होती है।