Dussehra 2021:आखिर क्यों श्रीराम को भी रावण को मारने के लिए लेनी पड़ी थी विभीषण की मदद
श्रीराम ने रावण का वध ज़रूर किया था लेकिन रावण को मारने में प्रभु को भी विभीषण की मदद लेनी पड़ी थी। आखिर क्या थी वजह आइये जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि दशमी को विजयादशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष दशहरा 15 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। श्रीराम ने विजयदशमी यानि दशहरा के दिन रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी। लेकिन रावण को मारना इतना आसान नहीं था। हालांकि रावण अमर तो नहीं था,लेकिन उसे मारना भी असंभव था। यहां तक कि श्रीराम को रावण का वध करने के लिए विभीषण की मदद लेनी पड़ी थी। आखिर क्या कारण था कि रावण को मारने में श्रीराम कि मदद विभीषण ने करी। चलिए जानते हैं ऐसा क्या था रावण के पास जो उसे सर्वशक्तिशाली बनाता था।
रावण एक सिद्ध ब्राह्मण था और परम तपस्वी. उसने अपनी तपस्या से कई वरदान प्राप्त किए थे। हालांकि रावण अमर तो नहीं था,लेकिन उसे मारना भी असंभव था. इसका कारण था अमृत कलश। रावण ने अमृत कलश अपनी नाभि में छिपा कर रखा था।
पुराणों के अनुसार रावण अमृत कलश प्राप्त करने के लिए अपने भाईयों कुंभकर्ण और विभीषण के साथ गोकुंड नाम के आश्रम में तपस्या के लिए गया था। उसने ब्रह्मदेव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। उसके लिए उसने दस हजार वर्षों तक तपस्या की थी। वह एक हजार वर्ष पूरा होने के बाद अपना एक सिर हवन कुंड में अर्पित कर देता था। इस प्रकार नौ हजार वर्ष पूर्ण होने के बाद वह अपने नौ सिरों को हवन कुंड में चढ़ा चुका था। जब दस हजार वर्ष पूर्ण होने वाले थे तो रावण अपना दसवां सिर भी हवन कुंड में चढ़ाने लगा,लेकिन उसी समय ब्रह्मा जी प्रकट हो गए और रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा ।
रावण ने ब्रह्म देव से अमृत्व का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने रावण से कहा कि ऐसा संभव नही है, जो भी इस पृथ्वी पर आया है उसे तो जाना ही पड़ेगा। तब रावण ने यह वर मांगा की मनुष्य जाति को छोड़कर और कोई भी उसका वध न कर सके। ब्रह्मा जी ने रावण को वरदान देते हुए उसके कटे हुए नौ सिर भी वापस कर दिए। ये वरदान ऐसा ही बना रहे इसीलिए ब्रह्मा जी ने रावण की नाभि में अमृत कुंड स्थापित कर दिया। अब रावण की मृत्यु तभी संभव थी जब उस कलश का अमृत सूख जाता।
जब प्रभु श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हो रहा था तब उसे मारने में बहुत समस्या हो रही थी। तभी विभीषण ने श्रीराम को संकेत दिया कि वह रावण कि नाभि में तीर मारें क्यूंकि वहां रावण ने अमृत कलश छिपा रखा है। इतना कहते ही श्रीराम ने तीर चला दिया और रावण मारा गया।