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द्रौपदी की एक प्रतिज्ञा से हुआ था कौरवों का अंत
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
Updated Mon, 17 Apr 2017 03:54 PM IST
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द्रौपदी वस्त्रहरण
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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज एक कार्यक्रम में तीन तलाक को द्रौपदी के चीर हरण के समान बताया। उनका माना है कि जिस तरह पांडवों की पत्नी द्रौपदी के चीर हरण के समय पूरी सभा मौन थी और उसी तरह तीन तलाक के मुद्दे पर भी कुछ लोगों के मुंह बंद हैं। गौरतलब है कि पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी महाभारत के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है और इनका विवाह पांच पाण्डवों से हुआ था।
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यज्ञ कुंड से हुआ था द्रौपदी का जन्म
महाकव्य महाभारत के अनुसार द्रौपदी का जन्म महाराज द्रुपद के यहां यज्ञकुंड से हुआ था। इसीलिए उन्हें यज्ञसेनी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है द्रौपदी ने पिछले जन्म ने पति पाने के लिए तपस्या की थी और भगवान शंकर ने उनकी इच्छा की। जिसके बाद द्रौपदी ने भगवान से पांच बार कहा कि वे सर्वगुणसंपन्न पति चाहती है। भगवान शिव ने कहा कि अगले जन्म में उनके पांच पति होंगे, क्योंकि उन्होंने पांच बार इस कामना को दोहराया था।
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अपमान का बदला लेना चाहते थे कौरव
कौरव द्रौपदी द्वारा हुए अपने अपमान का बदला लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने शकुनि के कहने पर पांडवों को जुआ खेलने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन शकुनि के चमत्कारी पासों की वजह से पांडव जुए में धीरे- धीरे सब कुछ हार गए। आखिर में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगाया और उसे भी हार गए। जिसके बाद कौरवों ने द्रोपदी का चीर हरण किया और द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई, लेकिन उस दिन द्रुपद की पुत्री ने प्रतिज्ञा ली, वे कौरवों के खून से अपने केश धोने के बाद ही उन्हें बांधेगी। इसी के बाद महाभारत का यु़द्ध हुआ।