फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   llingaraj temple in bhubaneswar

लिंगराज मंदिर में पीएम मोदी ने की पूजा, यहां शिव ने खुद बुझाई थी देवी पार्वती की प्यास

Sun, 16 Apr 2017 01:51 PM IST
amarujala.com- written by: किरण सिंह
amarujala.com- written by: किरण सिंह Updated Sun, 16 Apr 2017 01:51 PM IST
विज्ञापन
llingaraj temple in bhubaneswar
लिंगराज मंदिर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर में विशेष पूजा की। लिंगराज मंदिर को शहर के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। कहा जाता है कि देवी पार्वती ने यहीं पर लिट्टी व वसा नाम को दो राक्षसों का वध किया गया था। भुवनेश्वर मंदिर के यह मुख्य मंदिर 1400 वर्ष से भी पुराना है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें- भुवनेश्वरः PM मोदी ने लिंगराज के किए दर्शन, ओडिशा जीतने के लिए कार्यकर्ताओं को देंगे मंत्र
विज्ञापन


11 वीं शताब्दी में बना मंदिर
भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित इस मंदिर को 617-657 ई. में ललाटडुकेशरी ने बनवाया था, लेकिन इस मंदिर का जो वर्तमान स्वरूप है, वो 1090-1104 ई. में बना था। हालांकि मंदिर के कुछ हिस्से 1400 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

llingaraj temple in bhubaneswar
बिन्दुसागर सरोवर

मंदिर के पास है बिन्दुसागर सरोवर

विशालकाय लिंगराज मंदिर के पास ही बिंदुसागर सरोवर है। ऐसी मान्यता है कि राक्षसों का वध करने के बाद देवी पार्वती को जब प्यास लगी तो भगवान शिव ने एक कूप बनाया और उसमें सभी पवित्र नदियों को बुलाया। यहां पर पूजा करने से पहले बिन्दुसरोवर में स्नान करना जरूरी होता है।

इसके बाद क्षेत्रपति अनंत वासुदेव के दर्शन किए जाते हैं। गणेश पूजा के बाद गोपालनीदेवी, शिवजी के वाहन नंदी कही पूजा के बाद ही लिंगराज के दर्शन के लिए मुख्य स्थान पर प्रवेश किया जाता है। जहां आठ फीट मोटा व करीब एक फीट ऊंचा कर ग्रेनाइट पत्थर से स्वयंभूलिंग स्थिति है।

यह भी पढ़ें- मठ की महत्ता देख‌िए, जहां से योगी पहले बने महंत अब मुख्यमंत्री

 

llingaraj temple in bhubaneswar
मंदिर का शिखर

शिखर है खास

लिंगराज मंदिर अपनी अनुपम स्थात्यकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के हर शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला देखने लायक है। यही नहीं इस मंदिर का शिखर भारतीय मंदिरों के शिखरों के विकास क्रम की शुरुआती अवस्था का शिखर माना जाता है। शिखर की ऊंचाई करीब 180 फुट है। इसमें गणेश कार्तिकेय और गौरी के तीन छोटे मंदिर भी है।

यह भी पढ़ें- PM मोदी-मैल्कम ने मेट्रो में ली सेल्फी, अक्षरधाम मंदिर में क‌िया जलाभिषेक

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed