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Dev Uthani Ekadashi 2021: देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे सभी मांगलिक कार्य, देवउठनी पर करें यह उपाय

Manoj Kumar Dwivedi मनोज कुमार द्विवेदी
Updated Mon, 08 Nov 2021 03:38 PM IST
सार

कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से सभी मांगलिक कार्यों का आरंभ हो जाता है। इस बार देवउठनी एकादशी 14 नवंबर 2021 को पड़ रही है।

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Devotthan Ekadashi 2021 date in November do these measures on Devotthan Ekadashi for fulfillment of all your wishes
देवउठनी एकादशी से शुरू हो जाएंगे सभी मांगलिक कार्य (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है।

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मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह शयन के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं, इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर भगवान हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

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देवोत्थान एकादशी व्रत और पूजा विधि-
प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और उनसे जागने का आह्वान किया जाता है। इस दिन होने वाले धार्मिक कर्म इस प्रकार हैं।

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  • इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।
  • घर की सफाई के बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाना चाहिए।
  • एक ओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े, ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढांक देना चाहिए।
  • इस दिन रात्रि में घर के बाहर और पूजा स्थल पर दीये जलाना चाहिए।
  • रात्रि के समय परिवार के सभी सदस्य को भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाकर उठाना चाहिए |

तुलसी विवाह का आयोजन

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। तुलसी के वृक्ष और शालिग्राम की यह शादी सामान्य विवाह की तरह पूरे धूमधाम से की जाती है। चूंकि तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहते हैं इसलिए देवता जब जागते हैं, तो सबसे पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसी की ही सुनते हैं। तुलसी विवाह का सीधा अर्थ है, तुलसी के माध्यम से भगवान का आह्वान करना। शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपत्तियों के कन्या नहीं होती, वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुण्य अवश्य प्राप्त करें।

 

पौराणिक कथा आखिर सोते-जागते क्यों हैं श्री हरि?

एक बार भगवान विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मी जी ने आग्रह भाव में कहा-हे प्रभु!आप दिन-रात जागते हैं लेकिन,जब आप सोते हैं तो फिर कई वर्षों के लिए सो जाते हैं। ऐसे में समस्त प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए आप नियम से ही विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम मिलेगा। लक्ष्मी जी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले-'देवी'। तुमने उचित कहा है। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें मेरी सेवा में रहने के कारण विश्राम नहीं मिलता है। इसलिए आज से मैं हर वर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और योगनिद्रा कहलाएगी जो मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे, मैं उनके घर तुम्हारे सहित सदैव निवास करूंगा।

 

देवउठनी पर करें यह उपाय

इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें, मान्यता है कि ऐसा करने से विष्णु जी प्रसन्न होते हैं तथा मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

 

इस दिन प्रातः जल्दी उठकर नदी में अथवा घर में जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें, ऐसा करने से जीवन में आपको समस्त सुख प्राप्त होते हैं। ध्यान रखें स्नान करने के बाद गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें माना जाता है इससे स्वास्थ्य अच्छा होता है।  

 

धन वृद्धि के लिए आप एकादशी के दिन विष्णु मंदिर में सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते जरुर डालें। इससे भगवान विष्णु जल्दी ही प्रसन्न होते हैं।

 

ग्यारस (एकादशी) के दिन विष्णु मंदिर में एक नारियल व थोड़े बादाम चढ़ाएं। इस उपाय को करने से आपके सभी अटके कार्य बनने लगेंगे और सुखों की प्राप्ति होगी।

 

एकादशी के दिन आप पीले रंग के कपड़े, पीले फल व पीला अनाज पहले भगवान विष्णु को अर्पण करें, इसके बाद ये सभी वस्तुएं गरीबों व जरूरतमंदों में दान कर दें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहेगी।

 

इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक लगाएं और "ॐ वासुदेवाय नम:" मंत्र का जप करते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें। मान्यता है इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता।

 

देवोत्थान एकादशी के शुभ अवसर पर दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्री हरि विष्णु जी का अभिषेक करें। इससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं, और जीवन में धन वृद्धि होती हैै। 

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन यानि देवोत्थान एकादशी के दिन पीपल के किसी पेड़ पर जल चढ़ाएं और पेड़ के नीचे शाम को दीपक लगाएं। शास्त्रों में बताया गया है कि पीपल में भी भगवान विष्णु का ही वास होता है, इसलिए कहा जाता है कि इस उपाय को करना चाहिए, इससे कर्ज से मुक्ति मिलती है।  

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