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आस्था: गाय की पूजा का श्रेष्ठ माह है कार्तिक, ऐसे करें गौ सेवा और पूजा
Sat, 13 Nov 2021 10:59 AM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 13 Nov 2021 10:59 AM IST
सार
वेदों-पुराणों एवं अन्य शास्त्रों की मान्यता के अनुसार गौ में सभी देवी देवताओं का वास है इसीलिए इनकी पूजा को मंदिर में पूजा करने से भी श्रेष्ठ माना गया है। वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर में सभी देवों के राजा इंद्र हैं किन्तु गौओं के राजा इंद्र नहीं अपितु वासुदेव श्रीकष्ण हैं इसलिए यदि प्राणी गौ सेवा सेवा करते हैं तो उन्हें गौ के साथ-साथ गौओं के स्वामी श्रीकृष्ण की भी पूजा का फल भी तत्काल मिलता है।
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कार्तिक में ही सभी गायों ने श्रीकृष्ण को अपना स्वामी माना था, यह पर्व गोपाष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कार्तिक में ही सभी गायों ने श्रीकृष्ण को अपना स्वामी माना था, यह पर्व गोपाष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इन दिनों गौओं को विधिवत नहलाया जाता है पुनः स्वच्छ वस्त्रों से उनके शरीर का जल सुखाकर सींगों और खुरों को काले या गाढ़े भूरे रंग से लेप करके माथे पर हल्दी-चन्दन का टीका किया जाता है। उसी क्रम में यथोपलब्ध श्रृंगार सामग्री से सजाकर गंध, अक्षत पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ऋतुफल आदि से उनकी पूजा-अर्चना करके आरती की जाती है। वेदों-पुराणों एवं अन्य शास्त्रों की मान्यता के अनुसार गौ में सभी देवी देवताओं का वास है इसीलिए इनकी पूजा को मंदिर में पूजा करने से भी श्रेष्ठ माना गया है। वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर में सभी देवों के राजा इंद्र हैं किन्तु गौओं के राजा इंद्र नहीं अपितु वासुदेव श्रीकष्ण हैं इसलिए यदि प्राणी गौ सेवा सेवा करते हैं तो उन्हें गौ के साथ-साथ गौओं के स्वामी श्रीकृष्ण की भी पूजा का फल भी तत्काल मिलता है।
गौ यज्ञ का अभिन्न अंग
यज्ञांङग कथिता गावो यज्ञ एव च वासव। एताभिश्च बिना यज्ञो न वर्तते कथंञच्न।। अर्थात- गौओं को यज्ञों का अंग और साक्षात यज्ञ ही कहा गया है, इनके बिना किसी प्रकार का भी यज्ञ संपन्न नहीं हो सकता क्योंकि, इनके द्वारा प्रदान किए गए दूध, दही घी, गोबर आदि के द्वारा ही यज्ञ क्रिया संपन्न की जा सकती है अतः यज्ञ पुरुष की परम शक्ति गौवें ही हैं। इसलिए गौओं की शक्ति-महिमा को जानते हुए षोडशोपचार विधि से इनकी पूजा करने के लिए अग्नि पुराण में कहे गए इस मंत्र का ध्यान करें-
नमो गोभ्यः श्रीमतीभ्यः सौरभेयीभ्यः एव च। नमो ब्रह्मसुताभ्यश्च पवित्राभ्यो नमो नमः।।
गौओं को नमस्कार ! कामधेनु की संतानों को नमस्कार ! ब्रह्मा जी की पुत्रियों को नमस्कार ! पावन करने वाली गौओं को बार बार नमस्कार ! यदि आपको कोई भी गौ मन्त्र नहीं आता हो तो आप केवल, ॐ नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नमः, अथवा ॐ सुरभ्यै नमः।
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इस मन्त्र से भी इनकी पूजा संपन्न करके ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहे गए मन्त्र स्तुति करें कि,
कल्पवृक्षस्वरूपायै प्रदात्र्यै सर्वसम्पदाम्। श्रीदायै धनदायै च बुद्धिदायै नमो नमः।।
शुभदायै प्रसन्नायै गोप्रदायै नमो नमः। यशोदायै सौख्यदायै धर्माज्ञायै नमो नमः।।
हे कल्पवृक्षस्वरूपा ! समस्त सम्पदाओं को प्रदान करने वाली श्री-धन और बुद्धि देने वाली आपको प्रणाम है। हे परम प्रसन्न रूपा समस्त शुभ गौ की प्रदाता आपको प्रणाम है। हे यश और सौख्यप्रदान करने वाली धर्मज्ञादेवी आपको बार-बार प्रणाम है। इस प्रकार इस तिथि को गौ पूजन करके प्राणी सौख्य प्राप्त करते कष्टों की वैतरणी को भी सहजता से पार कर जाता है।
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गौ यज्ञ का अभिन्न अंग
यज्ञांङग कथिता गावो यज्ञ एव च वासव। एताभिश्च बिना यज्ञो न वर्तते कथंञच्न।। अर्थात- गौओं को यज्ञों का अंग और साक्षात यज्ञ ही कहा गया है, इनके बिना किसी प्रकार का भी यज्ञ संपन्न नहीं हो सकता क्योंकि, इनके द्वारा प्रदान किए गए दूध, दही घी, गोबर आदि के द्वारा ही यज्ञ क्रिया संपन्न की जा सकती है अतः यज्ञ पुरुष की परम शक्ति गौवें ही हैं। इसलिए गौओं की शक्ति-महिमा को जानते हुए षोडशोपचार विधि से इनकी पूजा करने के लिए अग्नि पुराण में कहे गए इस मंत्र का ध्यान करें-
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नमो गोभ्यः श्रीमतीभ्यः सौरभेयीभ्यः एव च। नमो ब्रह्मसुताभ्यश्च पवित्राभ्यो नमो नमः।।
गौओं को नमस्कार ! कामधेनु की संतानों को नमस्कार ! ब्रह्मा जी की पुत्रियों को नमस्कार ! पावन करने वाली गौओं को बार बार नमस्कार ! यदि आपको कोई भी गौ मन्त्र नहीं आता हो तो आप केवल, ॐ नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नमः, अथवा ॐ सुरभ्यै नमः।
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इस मन्त्र से भी इनकी पूजा संपन्न करके ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहे गए मन्त्र स्तुति करें कि,
कल्पवृक्षस्वरूपायै प्रदात्र्यै सर्वसम्पदाम्। श्रीदायै धनदायै च बुद्धिदायै नमो नमः।।
शुभदायै प्रसन्नायै गोप्रदायै नमो नमः। यशोदायै सौख्यदायै धर्माज्ञायै नमो नमः।।
हे कल्पवृक्षस्वरूपा ! समस्त सम्पदाओं को प्रदान करने वाली श्री-धन और बुद्धि देने वाली आपको प्रणाम है। हे परम प्रसन्न रूपा समस्त शुभ गौ की प्रदाता आपको प्रणाम है। हे यश और सौख्यप्रदान करने वाली धर्मज्ञादेवी आपको बार-बार प्रणाम है। इस प्रकार इस तिथि को गौ पूजन करके प्राणी सौख्य प्राप्त करते कष्टों की वैतरणी को भी सहजता से पार कर जाता है।