चैत्र नवरात्रि 2020: मां कुष्माणा की पूजा से मिलती है सभी रोगों से मुक्ति, संतान सुख का मिलता है आशिर्वाद
मां कुष्माण्डा हैं मां दुर्गा का चतुर्थ स्वरुप। जब सृष्टि नहीं थी और चारों तरफ सिर्फ अन्धकार ही अन्धकार था, तब मां दुर्गा के इसी स्वरुप ने हल्की सी मुस्कान बिखेर कर चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश उत्पन्न कर ब्रह्माण्ड की रचना की। इसीलिए मां कुष्माण्डा को आदिस्वरूपा व आदिशक्ति कहा गया। मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि अति प्रिय है और संस्कृत में कुम्हड़े को कूष्माण्ड कहते हैं। इसीलिए मां दुर्गा के इस स्वरुप को कूष्माण्डा कहा जाता है |
मां कूष्माण्डा का निवास
मां कुष्माण्डा का निवास सूर्यमण्डल के अंदर लोक में है। सूर्य के अंदर निवास करने की क्षमता केवल इन्हीं के अंदर है। मां कुष्माण्डा के तेज से चारों दिशाएं दैदीप्यमान हैं। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।
पूजा विधि
मां कूष्माण्डा का ज्योतिषीय संबंध
संतान प्राप्ति के लिए करें ये अचूक उपाय
इस दिन संतान प्राप्ति के लिए गोपाल यंत्र को विधि-विधान के साथ अपने पूजा-स्थल पर स्थापित करें तथा पांच दिन लगातार चांदी का नाग - नागिन का जोड़ा इस पर चढ़ाएं, जिन्हें छठे दिन बहते जल में प्रवाहित करें। छठे दिन शाम को ही सुन्दरकांड को पाठ विधि-विधान से करें। यदि सरकार या सरकारी नौकरी से सम्बंधित कोई समस्या है, तो इस उपाय को करें, इस दिन मां कूष्माण्डा को एक शंख और 11 नर्मदा कौड़ी अर्पित करें। उससे आपके कष्ट में व्यापक कमीं आएगी।