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Budh Pradosh Vrat 2024: प्रदोष व्रत आज, जानें शिव जी की पूजा विधि, महत्व और मुहूर्त

Wed, 07 Feb 2024 12:14 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Wed, 07 Feb 2024 12:14 AM IST
सार

त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान भोलेशंकर की पूजा की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा कई गुना ज्यादा फलदायी होती है।

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Budh Pradosh Vrat 2024 in February Date Tithi Puja Muhurat And Importance
भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है यह व्रत - फोटो : iStock

विस्तार

फरवरी माह में पहला प्रदोष व्रत आज यानी 7 तारीख को है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो बार त्रयोदशी तिथि पड़ती है और दोनों त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और शिव जी की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसा इस व्रत को करने शिव जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का जीवन सुख-शांति और समृद्धि से भर देते हैं। जो भी व्यक्ति नियम और निष्ठा के साथ प्रदोष व्रत रखता है, उसके सभी कष्टों का नाश होता है। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान भोलेशंकर की पूजा की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा कई गुना ज्यादा फलदायी होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं इस दिन शिव जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व...

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प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पौष माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 07 फरवरी के दिन दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से हो रही है। इसका समापन 08 फरवरी को सुबह 11 बजकर 17 मिनट पर होगा। शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है इसलिए 07 फरवरी को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 
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पूजा का मुहूर्त
07 फरवरी को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 05 से 08 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। बुधवार के दिन पड़ने के कारण इस प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। 

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत वाले दिन प्रात: स्नान आदि करके साफ कपड़े पहन लें। 
  • इसके बाद भोलेनाथ को याद करके व्रत एवं पूजा का संकल्प करें। 
  • फिर शाम के शुभ मुहूर्त में किसी शिव मंदिर जाकर या घर पर ही भगवान भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • पूजा के दौरान शिवलिंग को गंगाजल और गाय के दूध से स्नान कराएं। 
  • उसके बाद सफेद चंदन का लेप जरूर लगाएं। 
  • भगवान भोलेनाथ को अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी का पत्ता, सफेद फूल, शहद, भस्म, शक्कर आदि अर्पित करें। 
  • इस दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें।
  • पूजा के बाद शिव चालीसा, गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। घी का दीपक जलाएं और शिव जी की आरती करें। 
  • इसके बाद पूजा का समापन क्षमा प्रार्थना से करते हुए शिवजी के सामने अपनी मनोकामना व्यक्त कर दें।
  • वहीं इसके अगले दिन सुबह स्नान आदि के बाद फिर से शिव जी की पूजा करें। 
  • फिर सूर्योदय के बाद पारण करें।
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