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Bhishma Panchak: 4 नवंबर से शुरू हो रही है भीष्म पंचक, जानिए इसकी विधि और महत्व

Wed, 02 Nov 2022 10:28 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 02 Nov 2022 10:28 PM IST
सार

इस बार भीष्म पंचक व्रत 4 नवंबर, शुक्रवार 2022 से 8 नवंबर, मंगलवार तक किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी व्यक्ति भीष्म पंचक के दौरान व्रत और पूजा अर्चना करता है, उसे शुभ फल प्राप्त होता है।

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Bhishma Panchak Starts From November 4 know the puja vidhi and siginificance in Hindi
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक भीष्म पंचक व्रत किया जाता है। - फोटो : social media

विस्तार

Bhishma Panchak ka Mahatv: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक भीष्म पंचक व्रत किया जाता है। पांच दिन तक चलने के कारण इसे भीष्म पंचक कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार व्रत श्री कृष्ण ने प्रारंभ कराया था। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र में कौरव पांडवों के मध्य युद्ध समाप्त होने के बाद जब पितमाह भीष्म मृत्युशैय्या पर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर पांचों पांडवों ने कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पितामह से धर्म उपदेश ग्रहण किया था। उन्हीं पांच दिनों की स्मृति में पांच दिन का भीष्म पंचक व्रत किया जाता है। इस बार भीष्म पंचक व्रत 4 नवंबर, शुक्रवार 2022 से 8 नवंबर, मंगलवार तक किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी व्यक्ति भीष्म पंचक के दौरान व्रत और पूजा अर्चना करता है, उसे शुभ फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं भीष्म पंचक का महत्व और पूजा विधि 

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धार्मिक महत्व
कार्तिक मास में भीष्म पंचक व्रत का खास महत्व है। यह व्रत न केवल पूर्व में किए गए पाप कर्मों से मुक्ति दिलाता है बल्कि कल्याणकारी भी होता है। भीष्म पंचक व्रत बहुत मंगलकारी और पुण्यफलदायक माना जाता है। जो भी भक्त इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी साधक इस व्रत को करता है वह सदा स्वस्थ रहता है और प्रभु की कृपा उस पर बनी रहती है। 
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पूजा- विधि

  • प्रबोधनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद चौकी पर भगवान कृष्ण का चित्र और संभव हो तो भीष्म पितमाह की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें 
  • अब दीवार पर मिट्टी से सर्वतोभद्र की वेदी बनाकर कलश की स्थापना करें। 
  • अब भगवान कृष्ण और भीष्म पितामह को चंदन लगाएंऔर फल- फूल अर्पित करें। 
  • इसके बाद दीप जलाएं। यह दीप अखंड ज्योति का होना चाहिए जो पांच दिन तक जलना चाहिए। 
  • पांचवे दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर हवन करें। 
  • भीष्म पंचक व्रत समस्त प्रकार के सुख भोग और आध्यात्मिक, आत्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। 
  • इस व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
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