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Bageshwardham:क्या है हिंदू धर्म में सिद्धियों का मतलब? हनुमानजी के पास अष्ट सिद्धियां क्या हैं और कैसे मिलीं?

Sat, 21 Jan 2023 02:34 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 21 Jan 2023 02:34 PM IST
सार

शास्त्रों के अनुसार बजरंगबली भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार और अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है।

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शास्त्रों के अनुसार बजरंगबली को भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार और अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इन दिनों सोशल मीडिया और टीवी डिबेट में युवा कथावाचक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की चर्चा खूब हो रही है। बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कई तरह के आरोप और सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे देश में लोगों के बीच जादू-टोने और अंधविश्वास को फैला रहे हैं। वहीं पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन सभी आरोपों को नकारते हुए लोगों को चुनौती दे रहे हैं। दरअसल पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और उनके समर्थकों का मानना है कि उनके पास ऐसी सिद्धियां है जो लोगों के मन की बातों को फौरन ही जान लेते हैं और कष्टों का निवारण का उपाय बताते हैं। सनातन धर्म सिद्धि और दिव्य ज्ञान का विशेष महत्व होता है। सिद्धि का शाब्दिक अर्थ होता है पूर्णता को प्राप्ति करना। शास्त्रों में सिद्धियों का जन्म से, औषधि से,मंत्रों के द्वारा,तप और साधना से सिद्धियों को प्राप्त किया जा सकता है। सिद्धियों पर जीत हासिल कर लेने से दिव्व द्दष्टि की प्राप्ति होती है। सिद्धि के बल पर एक समय में दो स्थानों पर रहने की क्षमता आती है। पूरानी स्मृतियों को प्राप्त करने की विकास आदि होता है।

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शास्त्रों के अनुसार बजरंगबली को भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार और अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा में एक दोहा है जो सिद्धियों के बारे में है। अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता। इस दोहे में जिन अष्ट सिद्धियों की बात की गई है, वह बहुत ही चमत्कारी शक्तियां हैं। हनुमान जी की पास सभी आठों सिद्धियां का वरदान हासिल है। आइए जानते हैं इन आठ सिद्धियां कौन-कौन सी है और क्या है इस धार्मिक महत्व। ये 8 इस सिद्धियां इस प्रकार है- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और  वशित्व।

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Hanuman Ji - फोटो : iStock

1-अणिमा- इस सिद्धि को प्राप्त करने पर साधक किसी दूसरे को दिखाई नहीं पड़ता है और वह किसी भी चीज में बड़ी ही आसानी से साथ प्रवेश कर जाता है।

इस सिद्धि के बल पर हनुमान जी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं। इस सिद्धि का प्रयोग हनुमान जी ने तब किया था जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। इस सिद्धि का उपयोग करके ही हनुमान जी ने पूरी लंका का निरीक्षण किया था।अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।

2-महिमा- इस विद्या और तप के बल से योगी अपने आपको बहुत ही बड़ा रूप और आकार दे सकता है।

इस सिद्धि के बल पर हनुमान जी ने कई बार विशाल रूप धारण किया है। जब हनुमान जी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे तब बीच रास्ते में नागों की माता सुरसा ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमान जी स्वंय का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था। इसके अलावा माता सीता को श्री राम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वंय का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।
 

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Hanuman Ji - फोटो : iStock

3- गरिमा- इस सिद्धि के प्राप्त होने पर  योगी अपने आपको चाहे कितना भारी कर सकता है।

इस सिद्धि की मदद से हनुमान जी स्वंय का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।इस सिद्धि का उपयोग हनुमान जी ने महाभारत काल में भीम के सामने किया था। जब भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था, उस समय भीम के घमंड को तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बेठे हुए थे। भीम ने जब हनुमान जी की पूंछ उठाई तो वह उनकी पूंछ को नहीं  उठा सके, इस प्रकार भीम का घमंड का टूट गया।

4-लघिमा- इस सिद्धि का प्रयोग करते हुए साधक जितना हल्का होना चाहे उतना हल्क बन जाता है।

इस सिद्धि से बजरंगबली  स्वंय का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ जा सकते हैं। जब हनुमान जी अशोक वाटिका में पहुंचे तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वाटिका में पेड़ के पत्तों में छिप गए। इन पत्तों में बैठे- बैठे ही उन्होंने माता सीता को अपना परिचय दिया था। जिसके बाद माता सीता ने हनुमान जी को उनके असली रूप में सामने प्रकट होने के लिए कहा था।
 
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Hanuman Ji - फोटो : iStock

5-प्राप्ति - इस सिद्धि से योगी इच्छित चीजों की प्राप्ति बहुत ही आसानी के साथ कर सकता है।

इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं आने वाले समय को देख सकते हैं। रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमान जी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु पक्षियो से बातचीत की थी। जिससे वह यह जान सके कि माता सीता इस समय में कहा पर है और हनुमान जी बहुत महान ज्योतिष के जानकार भी हैं,इसकी शिक्षा इनके गुरु  भगवान सूर्य देव ने इन्हें प्रदान की थी। इन सबके कारण हनुमान जी ने माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।

6-प्राकाम्य-  इस सिद्धि को प्राप्त करने पर साधक के पास इतनी शक्ति आ जाती है कि वह अपनी इच्छानुसार पृथ्वी में समा सकता है या आकाश में उड़ान भर सकता है।

इसी सिद्धि की सहायता से हनुमान जी पाताल में भी जा सकते हैं। आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमान जी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। इसके साथ ही वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को धारण कर सकते हैं।रामचरितमानस के अनुसार हनुमान जी ने सुग्रीव के कहने पर ब्राह्मण का रूप धारण करके भगवान राम से भेंट की थी। प्राकाम्य सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।

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Hanuman Ji - फोटो : iStock

7- ईशित्व- इस सिद्धि को हासिल करने के बाद साधक में शासन करने की क्षमता आ जाती है।

इस सिद्धि के बल से हनुमान जी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं। ईशित्व के प्रभाव से हनुमान जी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा था। साथ ही इस सिद्धि से हनुमान जी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।

8-वशित्व- इस आठवीं सिद्धि को प्राप्त करने के बाद साधक दूसरों को वश में करने की क्षमता आ जाती है।

इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमान जी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं। वशित्व के कारण हनुमान जी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर सकते हैं। हनुमान जी के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमान जी अतुलित बल के धाम हैं।
 
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