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क्यों भक्तों से रूठे केदार और बद्रीनाथ?

Thu, 20 Jun 2013 11:50 AM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 20 Jun 2013 11:50 AM IST
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badrinath kedarnath disaster

महीनों इंतजार के बाद 14 मई को केदारनाथ के कपाट खुले। 16 मई को ब्रदीनाथ में श्रद्घालुओं को बद्रीनाथ के दर्शन मिलने लगे लेकिन एक महीने में ही बद्री और केदारनाथ भक्तों से ऐसे रूठे कि सब तबाह हो गया। जो भक्त जहां था वहीं फंस गया। न जाने कितने ही भक्त नदियों के प्रचंड वेग में बह गये तो कितने मलबों में दब गए।

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हर युग मे दर्शन में बढ़ती बाधा
सवाल उठता है कि पालनकर्ता भगवान विष्णु भगवान शिव के रौद्र रूप से भक्तों की रक्षा क्यों नहीं कर पाए। क्या शिव और विष्णु नहीं चाहते कि उनके भक्त अब उन तक आएं। बद्रीनाथ की कथा के अनुसार सतयुग में देवताओं, ऋषि मुनियों एवं साधारण मनुष्यों को भी भगवान विष्णु के साक्षात् दर्शन प्राप्त होते थे।
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इसके बाद आया द्वापर युग, इस समय भगवान सिर्फ देवताओं, ऋषि मुनियों को साक्षात् दर्शन देने लगे। लेकिन त्रेतायुग में भगवान यहां से विलीन ही हो गये। इनके स्थान पर एक विग्रह प्रकट हुआ। ऋषि-मुनियों एवं साधारण मनुष्यों को विग्रह के दर्शन से संतुष्ट होना पड़ा।

शास्त्रों के अनुसार सतयुग से लेकर त्रेता युग तक पाप का स्तर बढ़ता गया और भगवान के दर्शन दुर्लभ होते गये। त्रेता युग के बाद आया कलयुग, जो वर्तमान में चल रहा है।

पुराणों में बद्री केदारनाथ के रूठने का तथ्य
शास्त्र और पुराणों के जानकार पण्डित जय गोविंद शास्त्री बताते हैं कि पुराणों के अनुसार कलियुग के पांच हजार वर्ष बीत जाने के बाद पृथ्वी पर पाप का साम्राज्य फैल जाएगा। कलियुग अपने चरम रूप में आ जाएगा। लोगों की आस्था, लोभ और काम पर आधारित होगी, सच्चे भक्तों की कमी हो जाएगी। ठोंगी और पाखंडी व्यक्ति साधु-संत बनकर समाज की दिशा तय करेंगे।

इसका परिणाम यह होगा कि पृथ्वी पर मनुष्यों के पाप को धोने वाली गंगा स्वर्ग लौट जाएगी। गंगा के पृथ्वी से लौटने की घटना का वर्णन श्रीमद्देवी भागवत् पुराण में मिलता है। पुराण में भगवान ने यह भी कहा है कि वृंदावन और काशी को छोड़कर सभी तीर्थ पृथ्वी का त्याग कर देंगे।

कलयुग के जब दस हजार वर्ष पूरे हो जाएंगे तब शालिग्राम, शिव, शक्ति और जगन्नाथ जी भी पृथ्वी का त्याग करके अपने लोक को प्रस्थान कर जाएंगे। इनके साथ शंख, साधु, श्राद्ध कर्म, धर्म कर्म, देवताओं की पूजा एवं कीर्तन का भी पृथ्वी से लोप हो जाएगा।


बद्रीनाथ में नहीं होंगे भगवान के दर्शन

जोशीमठ में स्थित नृसिंह भगवान की मूर्ति का एक हाथ साल दर साल पतला होता जा रहा है। माना जाता है कि जिस दिन इनकी कलाई टूटकर गिर जाएगी उस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे। बद्रीनाथ का मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा।

भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे। उत्तराखंड में आयी प्राकृतिक आपदा इस बात का संकेत हो सकती है कि आने वाले कुछ वर्षों में वर्तमान बद्री और केदारनाथ भक्तों से नाता तोड़ लेंगे और भक्तों को भविष्य में 'भविष्यबद्री' में इनके दर्शन प्राप्त हो सकेंगे।

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