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amalaki ekadashi 2021: 25 मार्च को है आमलकी एकादशी, जानें एकादशी महात्म्य की कथा

Mon, 01 Mar 2021 11:49 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 01 Mar 2021 11:49 AM IST
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Amalaki Ekadashi 2021 date day significance and vrat katha in hindi
आमलकी एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)

हर माह दोनों पक्षों की ग्याहरवीं तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथि पड़ती हैं। एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। हर एकादशी का अपना एक अलग महत्व होता है। फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस बार एकादशी का व्रत 25 मार्च दिन गुरूवार को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। मान्यताओं के अनुसार अमालकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष का पूजन करने से सौ गायों का दान करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन करने के पश्चात एकादशी के महात्म्य की कथा पढ़नी या श्रवण करनी चाहिए। जानते हैं एकादशी व्रत की कथा।

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आमलकी एकादशी व्रत कथा-

कथा के अनुसार प्राचीन काल में चित्रसेन नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में एकादशी व्रत का बहुत महत्व था। राजा समेत सभी प्रजाजन एकादशी का व्रत श्रद्धा भाव के साथ किया करते थे। राजा की आमलकी एकादशी के प्रति बहुत गहरी आस्था थी।

एक बार राजा शिकार करते हुए जंगल में बहुत दूर निकल गये। उसी समय कुछ जंगली और पहाड़ी डाकुओं ने राजा को घेर लिया और डाकू शस्त्रों से राजा पर प्रहार करने लगे, परंतु जब भी डाकू राजा पर प्रहार करते वह शस्त्र ईश्वर की कृपा से पुष्प में परिवर्तित हो जाते।

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डाकुओं की संख्या अधिक होने के कारण राजा संज्ञाहीन होकर भूमि पर गिर गए। तभी राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उस दिव्य शक्ति ने समस्त दुष्टों को मार दिया, जिसके बाद वह अदृश्य हो गई। जब राजा की चेतना लौटी तो उसने सभी डाकुओं को मरा हुआ पाया। यह दृश्य देखकर राजा को आश्चर्य हुआ। राजा के मन में प्रश्न उठा कि इन डाकुओं को किसने मारा। तभी आकाशवाणी हुई कि हे राजन! यह सब दुष्ट तुम्हारे आमलकी एकादशी का व्रत करने के प्रभाव से मारे गए हैं। तुम्हारी देह से उत्पन्न आमलकी एकादशी की वैष्णवी शक्ति ने इनका संहार किया है तथा इन्हें मारकर वहां पुन: तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर गई। यह सारी बातें सुनकर राजा तो अत्यंत प्रसन्नता हुई, एकादशी के व्रत के प्रति राजा की श्रद्धा और भी बढ़ गई। तब राजा ने वापस लौटकर राज्य में सबको एकादशी का महत्व बतलाया।

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