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Shardiya Navratri: नवरात्रि पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें इन मंत्रों का जाप, दूर होंगे कष्ट
Mon, 22 Sep 2025 04:45 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 22 Sep 2025 04:45 PM IST
सार
नवरात्रि पर मां दुर्गा को उनके भक्त विशेष साधना, स्त्रोतों और मंत्रों का जाप करते हुए माता को प्रसन्न करते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि पर कुछ विशेष मंत्र जिनके जाप से व्यक्ति की हर एक मनोकामनाएं पूरी होती है।
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शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि का पर्व 22 अक्तूबर 2025 से शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि पर भक्त माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं ताकि मां प्रसन्न हों और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता के प्रसन्न होने पर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हर तरह की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि पर मां दुर्गा को उनके भक्त विशेष साधना, स्त्रोतों और मंत्रों का जाप करते हुए माता को प्रसन्न करते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि पर कुछ विशेष मंत्र जिनके जाप से व्यक्ति की हर एक मनोकामनाएं पूरी होती है।
1-ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।
2-ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
3-रक्तबीजवधे देवी चण्डमुण्ड विनाशनी।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
4-स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
5-पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
तारिणी दुर्ग संसार सागरस्य कुलोभ्दवाम्।।
6-रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।
7-देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
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रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
9-देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
10-'नवार्ण मंत्र'- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'
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1-ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।
2-ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
3-रक्तबीजवधे देवी चण्डमुण्ड विनाशनी।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
4-स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
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तारिणी दुर्ग संसार सागरस्य कुलोभ्दवाम्।।
6-रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।
7-देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
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8-वन्दिताप्राधियुगे देवी देव सौभाग्यदायिनी
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
9-देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
10-'नवार्ण मंत्र'- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'