Why hair is not cut during Navratri?: आज से यानी 22 सितंबर 2025 से शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो गया है। इन नौ दिनों में भक्तगण व्रत, पूजा और साधना में लीन रहकर मां दुर्गा की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। व्रत और पूजा के अलावा, इन नौ दिनों में कई नियमों का पालन भी किया जाता है, इनमें से एक नियम बाल और नाखून न काटना का भी है।
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Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में क्यों नहीं काटते हैं बाल और नाखून? जानें इसके पीछे का धार्मिक महत्व
Mon, 22 Sep 2025 02:36 PM IST
शिखर बरनवाल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Mon, 22 Sep 2025 02:36 PM IST
सार
अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि नवरात्रि में बाल और नाखून क्यों नहीं काटना चाहिए? नवरात्रि में नाखून और बालों का न काटना एक साधना है जो एकाग्रता को बनाए रखने में मदद करती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है। आइए इस लेख में इसी के धार्मिक महत्व के बारे में जानते हैं।
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नवरात्रि में नाखून क्यों नहीं काटते हैं?
- फोटो : Adobe Stock
नवरात्रि में नाखून क्यों नहीं काटते हैं?
- फोटो : Adobe Stock
देवी का वास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का घर में आगमन होता है और वे नौ दिनों तक वास करती हैं। ऐसे में घर की सात्विकता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इन पवित्र दिनों में भक्त बाल और नाखून काटने जैसे कामों से दूर रहते हैं, ताकि उनका पूरा ध्यान सिर्फ मां दुर्गा की भक्ति और साधना पर लगा रहे।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का घर में आगमन होता है और वे नौ दिनों तक वास करती हैं। ऐसे में घर की सात्विकता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इन पवित्र दिनों में भक्त बाल और नाखून काटने जैसे कामों से दूर रहते हैं, ताकि उनका पूरा ध्यान सिर्फ मां दुर्गा की भक्ति और साधना पर लगा रहे।
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नवरात्रि में बालक्यों नहीं काटते हैं?
- फोटो : Adobe stock
तंत्र साधना और तामसिक ऊर्जा
नवरात्रि का समय साधना और सिद्धि के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार बाल और नाखून का संबंध तामसिक (नकारात्मक) ऊर्जा से होती है। इन नौ दिनों में जब भक्त अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का प्रयास कर रहा होता है, तब बाल या नाखून काटने से शरीर में तामसिक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है, जो साधना में विघ्न डाल सकता है।
ये भी पढ़ें- Maa Shailputri Vrat Katha: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कथा सुनने का महत्व, मिलता है आशीर्वाद
नवरात्रि का समय साधना और सिद्धि के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार बाल और नाखून का संबंध तामसिक (नकारात्मक) ऊर्जा से होती है। इन नौ दिनों में जब भक्त अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का प्रयास कर रहा होता है, तब बाल या नाखून काटने से शरीर में तामसिक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है, जो साधना में विघ्न डाल सकता है।
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शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : Adobe Stock
भक्ति में एकाग्रता का प्रतीक
बाल और नाखून न काटना एक प्रकार की तपस्या और सादगी का भी प्रतीक है। इन नौ दिनों में भक्त अपने शरीर की साज-सज्जा और अन्य दुनियावी कार्यों से ध्यान हटाकर पूरी तरह से मां दुर्गा की भक्ति में लीन होना चाहता है। यह नियम व्यक्ति को शारीरिक श्रृंगार से दूर कर उसकी एकाग्रता को बढ़ाता है और उसकी ऊर्जा को आध्यात्मिक कार्यों में केंद्रित करने में मदद करता है।
बाल और नाखून न काटना एक प्रकार की तपस्या और सादगी का भी प्रतीक है। इन नौ दिनों में भक्त अपने शरीर की साज-सज्जा और अन्य दुनियावी कार्यों से ध्यान हटाकर पूरी तरह से मां दुर्गा की भक्ति में लीन होना चाहता है। यह नियम व्यक्ति को शारीरिक श्रृंगार से दूर कर उसकी एकाग्रता को बढ़ाता है और उसकी ऊर्जा को आध्यात्मिक कार्यों में केंद्रित करने में मदद करता है।
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नवरात्रि में नाखून क्यों नहीं काटते हैं?
- फोटो : Adobe Stock
प्राचीन दृष्टिकोण
पुराने समय में आज की तरह सुरक्षित उपकरण नहीं होते थे और नाखून या बाल काटते समय कटने-छिलने का खतरा रहता था, जिससे संक्रमण हो सकता था। व्रत के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो सकती है, ऐसे में किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए भी इस नियम का पालन किया जाता था। यह परंपरा आज भी आस्था का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
पुराने समय में आज की तरह सुरक्षित उपकरण नहीं होते थे और नाखून या बाल काटते समय कटने-छिलने का खतरा रहता था, जिससे संक्रमण हो सकता था। व्रत के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो सकती है, ऐसे में किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए भी इस नियम का पालन किया जाता था। यह परंपरा आज भी आस्था का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।