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Shani Jayanti 2024: ये हैं देश के 5 सबसे प्रसिद्ध शनि मंदिर, आप भी करें दर्शन

Thu, 30 May 2024 08:20 AM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: शिखर बरनवाल Updated Thu, 30 May 2024 08:20 AM IST
सार

इस साल शनि जयंती 6 जून 2024 को मनाई जाएगी। कर्मफल दाता भगवान शनि की जयंती के अवसर पर, आइए भारत के 5 प्रसिद्ध शनि मंदिरों के बारे में जानते हैं, जहां जीवन में कम से एक बार श्रद्धालु दर्शन के लिए जा सकते हैं।

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शनिदेव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

शनि देव को न्याय और कर्मफलदाता के रूप में जाना जाता है। शनि देव शनिवार और शनि ग्रह के देवता हैं। उनके नकारात्मक प्रभावों के डर से लोग अक्सर उनकी उपासना करते हैं। हालांकि, यह सच है कि शनि देव कर्म के अनुसार फल देते हैं। जो लोग कठिन परिश्रम, आत्मसंयम और सच्चे प्रयासों से अपना जीवन बनाते हैं, वही उनकी कृपा प्राप्त कर सफलता हासिल करते हैं। शनि देव की जयंती को शनि अमावस्या या शनि जयंती के नाम से जाना जाता है। इस साल शनि जयंती 6 जून 2024 को मनाई जाएगी। कर्मफल दाता भगवान शनि की जयंती के अवसर पर, आइए भारत के 5 प्रसिद्ध शनि मंदिरों के बारे में जानते हैं, जहां जीवन में कम से एक बार श्रद्धालु दर्शन के लिए जा सकते हैं।

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शनिश्वर भगवान मंदिर, तमिलनाडु
यह मंदिर, तिरुनल्लार में स्थित है और इसे भारत के प्रमुख नवग्रह मंदिरों में से एक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस भगवान की पूजा करने से शनि दोष, दुर्भाग्य और विपत्तियों के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है, साथ ही उनकी जन्मपत्री में शनि के सकारात्मक प्रभावों को भी बढ़ाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर परिसर में ही शनि देव ने भगवान शिव के सामने अपनी शक्तियां खो दी थीं। इसके अलावा, भक्तों का मानना है कि नलन तीर्थ के पवित्र सरोवर में स्नान करने से पिछले कर्मों के कारण होने वाले दुर्भाग्य और कष्टों को दूर किया जा सकता है।
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येरदनूर शनि मंदिर, तेलंगाना
यह मंदिर मेदक जिले में स्थित है और यहां भगवान शनि की 20 फीट ऊंची काले रंग की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति दो फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थित है, सिर्फ इस मूर्ति का वजन लगभग नौ टन है। बहुत से श्रद्धालु अपनी जन्मपत्री में शनि के नकारात्मक प्रभावों से राहत पाने की आशा में इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यहां सबसे अधिक प्रचलित रीतियों में से एक है सरसों या तिल के तेल से दीप जलाना।
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शनि महात्मा मंदिर, कर्नाटक
ऐसा माना जाता है कि चिक्का मड्डूर जिले में इस मंदिर के निर्माण क्षेत्र के एक स्थानीय किसान ने करवाया था। शनिवार के दिन, विशेष रूप से हिंदू श्रावण मास के दौरान, मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इन लोगों का मानना है कि यहां भगवान की पूजा करने या उनके लिए विशेष पूजा करने से पंचम या अष्टम शनि के हानिकारक प्रभावों को कम या खत्म किया जा सकता है। मंदिर के सामने, चूल्हे में भक्त तिल के तेल में भिगोए हुए काले कपड़े के छोटे टुकड़े में बंधे काले तिल डालते हैं।

शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र
यह मंदिर महाराष्ट्र के नेवासा तालुका में स्थित है, और यह देश का सबसे बड़ा शनि मंदिर माना जाता है। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें न तो छत है और न ही दीवारें। यहां शनि देव को पांच फुट ऊंचे काले पत्थर के रूप में दर्शाया गया है, जो एक चबूतरे पर स्थापित है जिसे सोनई के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि स्थानीय लोगों को नदी में बहता हुआ एक काला पत्थर मिला था, जिससे खून निकल रहा था। ग्राम मुखिया को स्वप्न में दर्शन हुआ और बताया गया कि यह पत्थर शनि देव का प्रतीक है। उन्होंने मुखिया को आदेश दिया कि पत्थर को गांव के मध्य में स्थापित किया जाए।

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शनि धाम मंदिर, दिल्ली
राजधानी दिल्ली में स्थित इस मंदिर में प्राकृतिक चट्टान से तराशी गई शनि देव की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति 21 फीट ऊंची है और इसे दुनिया की सबसे ऊंची शनि देव की मूर्ति माना जाता है।
भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में शनि देव की पूजा करने से उन्हें जीवन में आने वाली किसी भी कठिनाई को पार करने में मदद मिलती है। यह भी माना जाता है कि यदि कोई बीमार व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ मंदिर परिसर में आता है, तो उसे रोगों से मुक्ति मिल सकती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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