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Sankashti Chaturthi 2024: कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत आज, जानिए महत्व, पूजाविधि और चंद्रोदय का समय

Tue, 25 Jun 2024 12:09 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 25 Jun 2024 12:09 PM IST
सार

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 25 जून मध्य रात्रि 01:23 पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन इसी दिन रात्रि 11:10 पर होगा। ऐसे में कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत 25 जून 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा।

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Sankashti Chaturthi 2024 Date Know Shubh Muhurat Puja Vidhi and Tithi News in Hindi
Sankashti Chaturthi 2024: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। - फोटो : istock

विस्तार

प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथि होती हैं। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ''विनायक चतुर्थी '' और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को '' संकष्टी चतुर्थी '' कहते हैं। इस साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। गणेश जी की कृपा पाने के लिए वैसे तो कोई भी इस व्रत को कर सकता है, लेकिन अधिकांश सुहागिन स्त्रियां ही इस व्रत को परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं।

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कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 25 जून मध्य रात्रि 01:23 पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन इसी दिन रात्रि 11:10 पर होगा। ऐसे में कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत 25 जून 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा।
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चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन चंद्रदेव की उपासना का भी विधान है। इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 10:23 पर होगा।

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कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व
इस विशेष दिन पर भगवान गणेश के एकदंत रूप की उपासना की जाती है। इस दिन भगवान गणपति की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर-परिवार पर आ रही विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना से रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। नारद पुराण के अनुसार आषाढ़ की चतुर्थी को एक दूसरा कल्याणकारी व्रत होता है,क्योंकि यह तिथि रथन्तर कल्प का प्रथम दिन है।इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक गणेशजी की पूजा करके देवताओं के लिए दुर्लभ फल भी प्राप्त कर लेता है। भगवान गणेश विद्या के भी स्वामी है इसलिए जो छात्र इस दिन भगवान गणेश की उपासना करते हैं और उनके मंत्र का जाप करते हैं, उन्हें बल, बुद्धि और विद्या का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।    

पूजा और व्रत विधि
चतुर्थी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करके उपवास का संकल्प लेकर व्रती सवेरे से चंद्रोदय काल तक नियमपूर्वक रहे। चंद्रोदय होने पर मिट्टी की गणेश मूर्ति बनाकर उनके साथ उनके आयुध और वाहन भी लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। पूजा के वक्त व्रती को अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। पंचामृत से भगवान गणेश को स्नान करवाकर फल, फूल, रोली, मोली, अक्षत अर्पित कर मोदक का नैवेद्य अर्पण करें। गणेश जी की आरती के बाद 'ॐ गणेशाय नमः ' अथवा ' ॐ गं गणपतये नमः ' का यथाशक्ति जाप अवश्य करना चाहिए। तत्पश्चात तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चन्दन, कुश, फूल, अक्षत आदि डालकर चन्द्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद गणेश जी की कथा का वाचन या श्रवण करें।

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