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Raksha Bandhan 2025: जानें रक्षाबंधन पर चावल के दानों को रेशमी धागे से बांधने की क्यों है परंपरा?
Fri, 08 Aug 2025 05:07 PM IST
ज्योति मेहरा
कु. कृतिका, खत्री सनातन संस्था, दिल्ली
कु. कृतिका, खत्री सनातन संस्था, दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Fri, 08 Aug 2025 05:07 PM IST
सार
श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई की आरती करके उसे प्रेम का प्रतीक राखी बांधती है।
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रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
- फोटो : adobe stock
विस्तार
Raksha Bandhan 2025: श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई की आरती करके उसे प्रेम का प्रतीक राखी बांधती है। भाई भी बहन को उपहार देकर आशीर्वाद देता है। हजारों वर्षों से चल रहे इस पर्व का इतिहास, शास्त्र, राखी बनाने की विधि और इसका महत्व, सनातन संस्था द्वारा संकलित इस लेख में स्पष्ट किया गया है।
Raksha Bandhan 2025: राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान, दिशा और गांठों के लिए है विषेश नियम
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
पाताल में राजा बलि के हाथ पर लक्ष्मीजी ने राखी बांधकर उसे अपना भाई बना लिया और नारायण की मुक्ति कराई। वह दिन श्रावण पूर्णिमा का ही था। बारह वर्षों तक इंद्र और दैत्यों के बीच युद्ध चलता रहा। देवताओं के बारह वर्ष दैत्यों के बारह दिनों के समान थे। इंद्र थक चुके थे और दैत्य प्रभावी होते जा रहे थे। इंद्र अपनी जान बचाने के लिए युद्ध से भागने की तैयारी में थे। यह जानकर इंद्राणी गुरु बृहस्पति के पास गईं। गुरु ने ध्यान लगाकर कहा “यदि तुम अपने पतिव्रत के बल से संकल्प करो कि मेरे पति सुरक्षित रहें, और इंद्र के दाएं हाथ में एक धागा बांधो, तो इंद्र की विजय निश्चित है।” इंद्र की जीत हुई और इंद्राणी का संकल्प सफल हुआ। भविष्य पुराण के अनुसार रक्षाबंधन मूल रूप से राजाओं के लिए था और तभी से राखी बांधने की परंपरा चली आ रही है।
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भावनात्मक महत्व
राखी बहन भाई के हाथ पर राखी इसलिए बांधती है ताकि भाई समृद्ध हो और वह बहन की रक्षा करे, यही भावना इस पर्व के पीछे होती है।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन के दिन इस समय में न बांधे राखी, जान लें कब-कब है अशुभ मुहूर्त
राखी बांधने की विधि
चावल, सोना और सफेद मिश्री को एक कपड़े में बांधकर रक्षा (राखी) तैयार की जाती है। इसे रेशमी धागे से बांधा जाता है और यह मंत्र बोला जाता है:
"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।"
अर्थ- जिससे दानवों के महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा! तुम अडिग रहो।
चावल के दानों को रेशमी धागे से बांधने की परंपरा क्यों है?
चावल सर्वसमावेश का प्रतीक है, जो सभी को समाहित करता है। यह सभी तरंगों के आदान-प्रदान में सक्षम है। चावल को सफेद कपड़े में बांधकर रेशमी धागे से शिवरूप जीव के दाहिने हाथ पर बांधना सात्त्विक बंधन का निर्माण करता है। रेशमी धागा सात्त्विक तरंगों को गति देने में अग्रणी होता है।
Raksha Bandhan 2025: राखी की थाली में जरूर होनी चाहिए ये पांच चीजें, मिलते हैं शुभ फल
बहन राखी बांधते समय कैसा भाव रखें?
जब श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त बह रहा था, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली बांधी। बहन अपने भाई को कोई पीड़ा सहते नहीं देख सकती। भाई की रक्षा के लिए वह सब कुछ कर सकती है। राखी बांधते समय हर बहन को यही भावना रखनी चाहिए।
भाई द्वारा सात्त्विक उपहार देने का महत्व
रज-तम प्रधान वस्तुएं असात्त्विक होती हैं, इसलिए भाई को बहन द्वारा सात्त्विक उपहार दिया जाना चाहिए, जैसे कोई धार्मिक ग्रंथ, जपमाला आदि जिससे बहन की साधना में सहायता हो।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर भूलकर भी न बांधें अपने भाई को इस तरह की राखियां, मिलते हैं अशुभ परिणाम
प्रार्थना करें
बहन को भाई के कल्याण के लिए और भाई को बहन की रक्षा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही दोनों को मिलकर यह प्रार्थना करनी चाहिए “हमारे द्वारा राष्ट्र और धर्म की रक्षा हेतु प्रयास हो।”
राखी से देवताओं का अपमान रोकें
आजकल राखियों पर 'ॐ' या देवी-देवताओं की तस्वीरें होती हैं। राखी के बाद हाथसे राखी उतारकर उसे इधर-उधर फेंकने से देवताओं का और धार्मिक प्रतीकों का अपमान होता है। इससे बचने के लिए राखी का बहते पानी में विसर्जन करें।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर अपनी बहन को तोहफे में न दें ये चीजें, पड़ सकते हैं अशुभ प्रभाव
संदर्भ- सनातन संस्था का ग्रंथ - “पर्व, धार्मिक उत्सव एवं व्रत”
कु. कृतिका खत्री
सनातन संस्था, दिल्ली
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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान, दिशा और गांठों के लिए है विषेश नियम
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रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
पाताल में राजा बलि के हाथ पर लक्ष्मीजी ने राखी बांधकर उसे अपना भाई बना लिया और नारायण की मुक्ति कराई। वह दिन श्रावण पूर्णिमा का ही था। बारह वर्षों तक इंद्र और दैत्यों के बीच युद्ध चलता रहा। देवताओं के बारह वर्ष दैत्यों के बारह दिनों के समान थे। इंद्र थक चुके थे और दैत्य प्रभावी होते जा रहे थे। इंद्र अपनी जान बचाने के लिए युद्ध से भागने की तैयारी में थे। यह जानकर इंद्राणी गुरु बृहस्पति के पास गईं। गुरु ने ध्यान लगाकर कहा “यदि तुम अपने पतिव्रत के बल से संकल्प करो कि मेरे पति सुरक्षित रहें, और इंद्र के दाएं हाथ में एक धागा बांधो, तो इंद्र की विजय निश्चित है।” इंद्र की जीत हुई और इंद्राणी का संकल्प सफल हुआ। भविष्य पुराण के अनुसार रक्षाबंधन मूल रूप से राजाओं के लिए था और तभी से राखी बांधने की परंपरा चली आ रही है।
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भावनात्मक महत्व
राखी बहन भाई के हाथ पर राखी इसलिए बांधती है ताकि भाई समृद्ध हो और वह बहन की रक्षा करे, यही भावना इस पर्व के पीछे होती है।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन के दिन इस समय में न बांधे राखी, जान लें कब-कब है अशुभ मुहूर्त
राखी बांधने की विधि
चावल, सोना और सफेद मिश्री को एक कपड़े में बांधकर रक्षा (राखी) तैयार की जाती है। इसे रेशमी धागे से बांधा जाता है और यह मंत्र बोला जाता है:
"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।"
अर्थ- जिससे दानवों के महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा! तुम अडिग रहो।
चावल के दानों को रेशमी धागे से बांधने की परंपरा क्यों है?
चावल सर्वसमावेश का प्रतीक है, जो सभी को समाहित करता है। यह सभी तरंगों के आदान-प्रदान में सक्षम है। चावल को सफेद कपड़े में बांधकर रेशमी धागे से शिवरूप जीव के दाहिने हाथ पर बांधना सात्त्विक बंधन का निर्माण करता है। रेशमी धागा सात्त्विक तरंगों को गति देने में अग्रणी होता है।
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बहन राखी बांधते समय कैसा भाव रखें?
जब श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त बह रहा था, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली बांधी। बहन अपने भाई को कोई पीड़ा सहते नहीं देख सकती। भाई की रक्षा के लिए वह सब कुछ कर सकती है। राखी बांधते समय हर बहन को यही भावना रखनी चाहिए।
भाई द्वारा सात्त्विक उपहार देने का महत्व
रज-तम प्रधान वस्तुएं असात्त्विक होती हैं, इसलिए भाई को बहन द्वारा सात्त्विक उपहार दिया जाना चाहिए, जैसे कोई धार्मिक ग्रंथ, जपमाला आदि जिससे बहन की साधना में सहायता हो।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर भूलकर भी न बांधें अपने भाई को इस तरह की राखियां, मिलते हैं अशुभ परिणाम
प्रार्थना करें
बहन को भाई के कल्याण के लिए और भाई को बहन की रक्षा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही दोनों को मिलकर यह प्रार्थना करनी चाहिए “हमारे द्वारा राष्ट्र और धर्म की रक्षा हेतु प्रयास हो।”
राखी से देवताओं का अपमान रोकें
आजकल राखियों पर 'ॐ' या देवी-देवताओं की तस्वीरें होती हैं। राखी के बाद हाथसे राखी उतारकर उसे इधर-उधर फेंकने से देवताओं का और धार्मिक प्रतीकों का अपमान होता है। इससे बचने के लिए राखी का बहते पानी में विसर्जन करें।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर अपनी बहन को तोहफे में न दें ये चीजें, पड़ सकते हैं अशुभ प्रभाव
संदर्भ- सनातन संस्था का ग्रंथ - “पर्व, धार्मिक उत्सव एवं व्रत”
कु. कृतिका खत्री
सनातन संस्था, दिल्ली
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