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Nirjala Ekadashi 2024: 18 जून को निर्जला एकादशी, भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए करें ये उपाय

Wed, 12 Jun 2024 11:38 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 12 Jun 2024 11:38 AM IST
सार

धार्मिक मान्यता के अनुसार सभी एकादशियों में श्रेष्ठ एवं अक्षय फल प्रदान करने वाली ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला या भीमसेनी एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। इस व्रत में पानी पीना वर्जित है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।

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Nirjala Ekadashi 2024 Kab Hai Date KNow Vrat Katha Puja Vidhi and Impotance in Hindi
Nirjala Ekadashi 2024: उदया तिथि के अनुसार 18 जून 2024 को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Nirjala Ekadashi 2024: एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अतिप्रिय है। इस तिथि को भगवान विष्णु के अनुयायियों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक उपलब्धि का माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सभी एकादशियों में श्रेष्ठ एवं अक्षय फल प्रदान करने वाली ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला या भीमसेनी एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। इस व्रत में पानी पीना वर्जित है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 17 जून सुबह 4:43 पर शुरू हो रही है। इसका समापन 18 जून सुबह 06:24 पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 18 जून 2024 को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन आप भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए क्या करें और क्या नहीं करें।

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निर्जला एकादशी के दिन करें ये उपाय

  • इस एकादशी को श्री हरि को प्रिय तुलसी की मंजरी तथा पीला चन्दन, रोली, अक्षत, पीले पुष्प, ऋतु फल एवं धूप-दीप, मिश्री आदि से भगवान दामोदर का भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए। इस दिन तुलसी के पत्र नहीं तोड़ने चाहिए, शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित बताया गया है।
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  • वैसे तो इस व्रत में एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक निर्जल रह कर व्रत करने का विधान है पर जो लोग कमजोर या फिर बीमार रहते हैं वह जल पीकर और एक बार फलहार कर सकते हैं।
  • एकादशी के दिन गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर विष्णुजी की कृपा पाता है।
  • रात्रि के समय भगवान नारायण की प्रसन्नता के लिए नृत्य, भजन-कीर्तन और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए। जागरण करने वाले को जिस फल की प्राप्ति होती है,वह हज़ारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता।
  • व्रत की सिद्धि के लिए भगवान विष्णु के समक्ष घी का अखंड दीपक जलाएं एवं दीपदान करना शुभ माना गया है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस दिन आसमान के नीचे सांयकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्वलित करने चाहिए, गंगा आदि पवित्र नदियों में दीप दान करना चाहिए।
  • यह व्रत ज्येष्ठ मास में पड़ने के कारण इस दिन गर्मी से राहत देने वाली शीतल वस्तुओं का दान करना चाहिए। इस दिन गोदान, वस्त्रदान, छत्र, जूता, फल आदि का दान करना बहुत ही लाभकारी होता है।
  • इस दिन साधक को बिना जल पिए जरूरतमंद व्यक्ति या किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को शुद्ध पानी से भरा घड़ा दान करने से प्राणी को परमगति प्राप्त होती है। जल से भरा हुआ घड़ा आप मंदिर में भी दान कर सकते हैं।  
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