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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Navratri 2025 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi Mantra Katha And Significance

Navratri 2025: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा, जानिए महत्व, पूजाविधि और मंत्र

Mon, 31 Mar 2025 05:20 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 31 Mar 2025 05:20 PM IST
सार

Navratri 2025 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi: देवी चंद्रघंटा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिस कारण इन्हें 'चंद्रघंटा' नाम से पुकारा जाता है।

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Navratri 2025 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi Mantra Katha And Significance
देवी चंद्रघंटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Navratri 2025 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi: नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में प्रत्येक दिन एक विशेष देवी की पूजा की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जिनका स्वरूप सौम्य और शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ अत्यंत शक्तिशाली भी है। देवी चंद्रघंटा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिस कारण इन्हें 'चंद्रघंटा' नाम से पुकारा जाता है।
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मां चंद्रघंटा पूजा महत्व
शास्त्रों के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अलौकिक तेज, वीरता और साहस की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्तों को शत्रु भय, मानसिक अशांति और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। देवी चंद्रघंटा की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति आती है। उनकी उपासना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है, जिससे वह अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना कर सकता है। यह भी मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति का संचार होता है।
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चंद्रघंटा पूजा विधि
देवी चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन प्रातः स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र धारण करके श्रद्धा भाव से करनी चाहिए। सबसे पहले कलश स्थापना कर देवी का आह्वान किया जाता है। इसके बाद गंगाजल से देवी की प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है। फिर माता को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। देवी चंद्रघंटा को दूध और उससे बने प्रसाद विशेष रूप से प्रिय होते हैं, इसलिए इस दिन दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ कर देवी की आरती की जाती है। माता को कमल या पीले फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में देवी से परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए।

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मंत्र
मां चंद्रघंटा की कृपा पाने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है:
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥

ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥

बीज मंत्र: ऐं श्रीं शक्तयै नम:

अन्य मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः

इन मंत्रों का श्रद्धा भाव से जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वह आंतरिक शांति तथा आत्मबल प्राप्त करता है। देवी चंद्रघंटा की आराधना करने से साधक में वीरता, साहस और आत्मविश्वास का विकास होता है।

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