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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि के पावन दिन पर कब और कैसे धारण करें रुद्राक्ष? यहां जानिए सारे नियम

Mon, 31 Mar 2025 01:28 PM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीक्षा पाठक Updated Mon, 31 Mar 2025 01:28 PM IST
सार

Rudraksha And Gemstone: इस पावन समय में रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक गहना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का एक सशक्त स्रोत है। खासतौर पर नौ मुखी रुद्राक्ष को देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है, जिससे यह नवरात्रि के दौरान और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

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Chaitra Navratri 2025 When and how to wear Rudraksha on the holy day of Chaitra Navratri Know here disprj
रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik.com

भारत के हर कोने में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाने वाली चैत्र नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और नए ऊर्जा का संचार करने वाला उत्सव भी है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। साथ ही यह विशेष रूप से यह काल हिंदू नववर्ष का प्रारंभ भी करता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। वर्ष 2025 में यह शुभ अवसर 30 मार्च, रविवार से 7 अप्रैल, सोमवार तक रहेगा, जब भक्तजन व्रत, पूजा-अर्चना और साधना के माध्यम से देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।



इस पावन समय में रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक गहना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का एक सशक्त स्रोत है। खासतौर पर नौ मुखी रुद्राक्ष को देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है, जिससे यह नवरात्रि के दौरान और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसे धारण करने से मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

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रुद्राक्ष। - फोटो : अमर उजाला।

क्या है रुद्राक्ष का महत्व?
भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष को भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद माना गया है। इसे धारण करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऊर्जात्मक कवच का निर्माण होता है, जो नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है। नौ मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से मां दुर्गा, ऋषि कपिल और भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। यह नाग देवता से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए जो लोग नागों की पूजा करते हैं, उनके लिए इसे धारण करना विशेष रूप से लाभकारी होता है।

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भगवान शिव की भक्ति में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। - फोटो : अमर उजाला

रुद्राक्ष का मानसिक और आध्यात्मिक क्या है?
यह दिव्य रुद्राक्ष मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है, साथ ही भय, तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है। यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मन की स्थिरता को बढ़ाता है और साधना में पूरा मन लगाता है। बता दें कि विशेष रूप से यह कामकाजी महिलाओं के लिए काफी लाभदायक माना जाता है, क्योंकि यह मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत करता है।

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रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik.com

ऐसे करें धारण
चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसकी शुद्धि और सिद्धि आवश्यक होती है। इसे गंगाजल या किसी पवित्र जल से धोकर शुद्ध किया जाता है, इसके बाद इस पर चंदन लगाया जाता है और ताजे फूल अर्पित किए जाते हैं। फिर "ॐ दुम दुर्गाय नमः" या "ॐ ह्रीं हूम नमः नव दुर्गाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। धारण करने की विधि के अनुसार, इसे पहनते समय उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके मंत्र जाप करना चाहिए।

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रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik.com

इन नियमों का करना पड़ता है पालन
रुद्राक्ष धारण करने के बाद कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। इसे प्रतिदिन पूजा के साथ पवित्र बनाए रखना चाहिए और कभी भी टूटा हुआ रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। इसे किसी दूसरे व्यक्ति को देना या किसी से साझा करना गलत माना जाता है। साबुन या अन्य रसायनों के संपर्क में आने से इसकी ऊर्जा प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसे स्नान के समय निकाल देना चाहिए। सात्विक जीवन शैली का पालन करना आवश्यक होता है, जिसमें मांसाहार, शराब और धूम्रपान से दूर रहना शामिल है। जब भी किसी अंतिम संस्कार या शोक सभा में जाएं, तो इसे उतार देना चाहिए ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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