फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Muharram 2024 date in india know History And Significance In hindi

Muharram 2024: कब है मुहर्रम, जानिए महत्व और आशूरा की सही तारीख

Mon, 08 Jul 2024 10:59 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 08 Jul 2024 10:59 AM IST
विज्ञापन
Muharram 2024 date in india know History And Significance In hindi
Muharram 2024 date in india - फोटो : अमर उजाला

Muharram 2024: इस्लाम धर्म के लोगों के लिए मुहर्रम का दिन बेहद खास होता है। इसे नए साल के रूप में मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। इसे बकरीद के 20 दिनों के बाद मनाया जाता है। भारत में मुहर्रम मनाने की तारीख चांद निकलने पर तय की जाती है। ऐसे में हर साल इसकी तारीख बदलती है।

विज्ञापन

बता दें इस्लामी कैलेंडर में 12 महीने होते हैं, जिसमें से 4 सबसे पवित्र माने जाते हैं, इनमें जुल- का'दा, जुल-हिज्जा और मुहर्रम और चौथा रजब का नाम शामिल है। इन माह को अल्लाह की दया और कृपा पाने के लिए सबसे उचित माना जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार मुहर्रम में सदका करना बेहद शुभ होता है। इससे अल्लाह का आशीर्वाद पूरे साल बना रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल मुहर्रम कब है और इसे कैसे मनाया जाता है।

विज्ञापन

कब है मुहर्रम 2024?

इस्लामिक कैलेंडर अनुसार इस साल 7 जुलाई 2024 से मुहर्रम शुरू हो रहा है। वहीं आशूरा मनाने की तारीख 17 जुलाई है।

मुहर्रम का महत्व

एक तरफ जहां मुहर्रम को नए साल के रूप में मनाया जाता है, वहीं इसे मातम का दिन भी माना जाता है। बता दें मुहर्रम की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा के नाम से जाना जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इस दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। हजरत इमाम हुसैन को इस्लाम धर्म का संस्थापक माना जाता है। वह हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। ऐसे में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम के 10वें दिन को लोग मातम के रूप में मनाते हैं, जिसे आशूरा कहा जाता है। वहीं कुछ लोग इस दिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में जुलूस भी निकालते हैं।


कब रखा जाता है रोजा

मुहर्रम को लेकर शिया और सुन्नी दोनों समुदाय की अलग-अलग मान्यताएं है। ये दोनों इस दिन को अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। कहते हैं कि इस दिन रोजा रखने से अल्लाह खुश होते हैं और उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस दौरान सुन्नी समुदाय के लोग 9 और 10 वीं तारीख को रोजा रखते हैं, तो वहीं शिया समुदाय के लोग 1 से 9 तारीख के बीच में रोजा रखते हैं।

 
क्यों मनाया जाता है मुहर्रम?

इस्लाम धर्म के लोगों का प्रमुख त्योहार मुहर्रम को मनाने के पीछे ऐसा माना जाता है कि हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ मोहर्रम माह के 10वें दिन कर्बला के मैदान में शहीद हो गए थे। इसलिए उनकी शहादत और कुर्बानी के तौर पर, इस दिन को याद किया जाता है और  जुलूस भी निकाले जाते हैं।


कैसे मनाया जाता है मुहर्रम?

मुहर्रम के दिन शिया समुदाय के लोग इस दिन जुलूस निकालते हैं। दूसरी ओर सुन्नी समुदाय के कुछ लोग आशूर के दिन रोजा रखते हैं। ये दोनों समुदाय अपनी अपनी मान्यताओं के अनुसार इस दिन को मनाते हैं।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed