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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Margashirsha Amavasya 2023 do these things on this auspicious date in hindi

Margashirsha Amavasya 2023: मार्गशीर्ष अमावस्या पर करें ये काम, मां लक्ष्मी बरसाएंगी कृपा

Mon, 11 Dec 2023 12:14 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 11 Dec 2023 12:14 AM IST
सार

वैदिक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर मंगलवार को सुबह 06:24 बजे से प्रारंभ होगी जो अगले दिन 13 दिसंबर बुधवार को सुबह 05:01 बजे तक रहेगी।

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Margashirsha Amavasya 2023 do these things on this auspicious date in hindi
Margashirsha Amavasya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Margashirsha Amavasya 2023: मार्गशीर्ष अमावस्या मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह महीना नवंबर-दिसंबर में आता है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत करने से पितर प्रसन्न होते हैं। उस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान करने की परंपरा है। स्नान के बाद सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए पितरों को प्रसन्न करने के उपाय किए जाते हैं। इस दिन कुछ आसान उपाय अपनाकर भक्त पितृ दोष से भी छुटकारा पा सकते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर मंगलवार को सुबह 06:24 बजे से प्रारंभ होगी जो अगले दिन 13 दिसंबर बुधवार को सुबह 05:01 बजे तक रहेगी। मार्गशीर्ष अमावस्या पर कुछ उपाय करने मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। 

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मार्गशीर्ष अमावस्या पर करें ये उपाय 

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान के बाद पितरों को जल तर्पण करना चाहिए। अपने पूर्वजों को याद करना चाहिए और उन्हें याद करते हुए अपने हाथों में पवित्र कुश रखना चाहिए। फिर उन्हें काले तिल और जल से पितरों को तर्पण करना चाहिए। प्रचलित मान्यता के अनुसार इससे पितर प्रसन्न होंगे।
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  • पितृ दोष से मुक्ति के लिए मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन त्रिपिंडी श्राद्ध कर सकते हैं। यदि यह अनुष्ठान विधिपूर्वक किया जाए तो तीन पीढ़ियों के पूर्वज प्रसन्न हो जाते हैं। उनके आशीर्वाद से सुख, शांति और समृद्धि में वृद्धि होगी।
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  • इस दिन अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए पंचबली अनुष्ठान कर सकते हैं। इस अनुष्ठान में पितरों के लिए भोजन बनाया जाता है। फिर यह भोजन कौवे, गाय, कुत्ते, चींटियों और अन्य लोगों को दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान से पितरों को पोषण मिलता है और वे अपने वंशजों को भी आशीर्वाद देते हैं।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद पितृ देवता अर्यमा की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान भक्तों को पितृ सूक्तम का पाठ करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होंगे।

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