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Uttarayan 2025: सूर्य के उत्तरायण का दिन है मकर संक्रांति, जानिए उत्तरायण का महत्व
Tue, 14 Jan 2025 12:43 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 14 Jan 2025 12:43 PM IST
सार
Makar Sankranti 2025: उत्तरायण के दौरान किए गए यज्ञ, अनुष्ठान और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस समय सूर्य पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
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प्रयागराज महाकुंभ 2025
- फोटो : x/@myogioffice
विस्तार
Makar Sankranti 2025: भारतीय संस्कृति में सूर्य की गति का विशेष महत्व है। पृथ्वी के उत्तर गोलार्ध में सूर्य के उत्तरायण होने को अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। उत्तरायण का आरंभ हर वर्ष मकर संक्रांति से होता है और यह छह महीने तक चलता है। इस दौरान सूर्य दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर गमन करता है। धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण
ऋतु परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा
उत्तरायण के समय पृथ्वी पर दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। सूर्य की किरणें अधिक समय तक धरती पर रहती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह समय नई शुरुआत और प्रगति का प्रतीक है। इसलिए इस दौरान शुभ कार्य, नई योजनाएं और दान-पुण्य करना श्रेष्ठ माना गया है।
आध्यात्मिक साधना का समय
योग और ध्यान में उत्तरायण को विशेष महत्व दिया गया है। योग शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में ध्यान, जप और तप करने से व्यक्ति को आत्मज्ञान प्राप्त होता है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा तीव्र होती है, जो साधकों को ईश्वर से जोड़ने में सहायक होती है।
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यज्ञ और अनुष्ठानों का प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण के दौरान किए गए यज्ञ, अनुष्ठान और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस समय सूर्य पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
पौराणिक दृष्टिकोण
भीष्म पितामह और उत्तरायण
महाभारत में भीष्म पितामह का उत्तरायण के प्रति गहरा विश्वास देखने को मिलता है। उन्होंने अपनी मृत्यु के लिए उत्तरायण काल का इंतजार किया। शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण के समय प्राण त्यागने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देवताओं का दिन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन उनकी रात मानी जाती है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य सीधे देवताओं तक पहुंचते हैं, जिससे विशेष आशीर्वाद मिलता है।
भगवान विष्णु की विजय
उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रांति से होता है। इस दिन भगवान विष्णु ने धरती पर असुरों का नाश किया था। इसे धर्म की विजय और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है।
ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में उत्तरायण को अत्यंत शुभ बताया गया है। इस समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर राशि शनि ग्रह की होती है, जो कर्म और न्याय का प्रतीक है। सूर्य और शनि का यह मिलन जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति आज, जानें उत्तरायण का महत्व
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
उत्तरायण केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। भारत में मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी और बिहू जैसे त्योहार इसी अवधि में आते हैं। ये त्योहार कृषि और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने के प्रतीक हैं।
स्वास्थ्य और जीवनशैली पर प्रभाव
उत्तरायण के समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं, जिससे शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ती है। यह मौसम स्वास्थ्य के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को ऊर्जावान बनाता है।
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शास्त्रीय दृष्टिकोण
ऋतु परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा
उत्तरायण के समय पृथ्वी पर दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। सूर्य की किरणें अधिक समय तक धरती पर रहती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह समय नई शुरुआत और प्रगति का प्रतीक है। इसलिए इस दौरान शुभ कार्य, नई योजनाएं और दान-पुण्य करना श्रेष्ठ माना गया है।
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आध्यात्मिक साधना का समय
योग और ध्यान में उत्तरायण को विशेष महत्व दिया गया है। योग शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में ध्यान, जप और तप करने से व्यक्ति को आत्मज्ञान प्राप्त होता है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा तीव्र होती है, जो साधकों को ईश्वर से जोड़ने में सहायक होती है।
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यज्ञ और अनुष्ठानों का प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण के दौरान किए गए यज्ञ, अनुष्ठान और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस समय सूर्य पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
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पौराणिक दृष्टिकोण
भीष्म पितामह और उत्तरायण
महाभारत में भीष्म पितामह का उत्तरायण के प्रति गहरा विश्वास देखने को मिलता है। उन्होंने अपनी मृत्यु के लिए उत्तरायण काल का इंतजार किया। शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण के समय प्राण त्यागने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देवताओं का दिन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन उनकी रात मानी जाती है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य सीधे देवताओं तक पहुंचते हैं, जिससे विशेष आशीर्वाद मिलता है।
भगवान विष्णु की विजय
उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रांति से होता है। इस दिन भगवान विष्णु ने धरती पर असुरों का नाश किया था। इसे धर्म की विजय और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है।
ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में उत्तरायण को अत्यंत शुभ बताया गया है। इस समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर राशि शनि ग्रह की होती है, जो कर्म और न्याय का प्रतीक है। सूर्य और शनि का यह मिलन जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति आज, जानें उत्तरायण का महत्व
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
उत्तरायण केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। भारत में मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी और बिहू जैसे त्योहार इसी अवधि में आते हैं। ये त्योहार कृषि और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने के प्रतीक हैं।
स्वास्थ्य और जीवनशैली पर प्रभाव
उत्तरायण के समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं, जिससे शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ती है। यह मौसम स्वास्थ्य के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को ऊर्जावान बनाता है।