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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Karwa Chauth 2022 Vrat Fasting Rules Puja Vidhi And Auspisious Yog

Karwa Chauth 2022 : करवाचौथ पर बुधादित्य योग में अर्घ्य देंगी महिलाएं, जानिए चंद्र पूजन क्यों?

Mon, 10 Oct 2022 11:08 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 10 Oct 2022 11:08 AM IST
सार

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल कर्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 13 अक्तूबर को करवाचौथ का महापर्व मनाया जाएगा,जिसमें महिलाएं अखंड सौभाग्य का व्रत करेंगी और चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य देकर सुखी गृहस्थ जीवन की कामना करेंगी।

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Karwa Chauth 2022 Vrat Fasting Rules Puja Vidhi And Auspisious Yog
Karwa Chauth 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष करवा चौथा का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। - फोटो : istock

विस्तार

Karwa Chauth 2022 : हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल कर्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 13 अक्तूबर को करवाचौथ का महापर्व मनाया जाएगा,जिसमें महिलाएं अखंड सौभाग्य का व्रत करेंगी और चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य देकर सुखी गृहस्थ जीवन की कामना करेंगी। इसी के साथ दिन का आरंभ सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ हो रहा है। इस दिन शुक्र और बुध दोनों एक राशि यानी कन्या राशि में रहेंगे,इसलिए इस दिन लक्ष्मी-नारायण योग बनेगा। इसके अलावा बुध और सूर्य भी एक साथ हैं,जिस वजह से बुध आदित्य योग भी इस दिन बन रहा है,जो श्रेष्ठ फलदाई रहेगा। 

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इसलिए की जाती है चौथ पर चंद्रमा की पूजा
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है,जो मन की चंचलता को नियंत्रित करता है। हमारे शरीर में दोनों भौहों के मध्य मस्तक पर चंद्रमा का स्थान माना गया है। यहां पर महिलाएं बिंदी या रोली का टीका लगती हैं,जो चंद्रमा को प्रसन्न कर मन का नियंत्रण करती हैं। भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र की उपस्थिति उनके योगी स्वरूप को प्रकट करती हैं। अर्धचंद्र को आशा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि सौभाग्य,पुत्र,धन-धान्य,पति की रक्षा एवं संकट टालने के लिए चंद्रमा की पूजा की जाती है।
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करवाचौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का एक अन्य कारण यह भी है कि चंद्रमा औषधियों और मन के अधिपति देवता हैं। उसकी अमृत वर्षा करने वाली किरणें वनस्पतियों और मनुष्य के मन पर सर्वाधिक प्रभाव डालती हैं। दिन भर उपवास के बाद चतुर्थी के चंद्रमा को छलनी की ओट में से सभी नारियां देखती हैं,तो उनके मन पर पति के प्रति अनन्य अनुराग का भाव उत्पन्न होता है,उनके मुख व शरीर पर एक विशेष कांति आ जाती है। इससे महिलाओं का यौवन अक्षय,स्वास्थ्य उत्तम और दांपत्य जीवन सुखद हो जाता है। उपनिषद के अनुसार जो व्यक्ति चंद्रमा में पुरुषरूपी ब्रह्म को जानकार उसकी उपासना करता है,वह उज्जवल जीवन व्यतीत करता है। उसके सारे कष्ट दूर होकर सभी पाप नष्ट हो जाते हैं एवं वह लंबी आयु पाता है। चंद्रदेव की कृपा से उपासकों की इस लोक और परलोक में रक्षा होती है।

करवा चौथ पूजा नियम

  • पूजा की थाली में रोली,चावल,दीपक,फल,फूल,पताशा,सुहाग का सामान और जल से भरा कलश रखा जाता है। करवा के ऊपर मिटटी की सराही में जौ रखे जाते हैं। जौ समृद्धि,शांति,उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ध्यान रहे कि पूजा की थाली में खंडित चावल व माचिस न रखें।                
  • चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। भूलकर भी अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न पड़ें,ऐसा होना शुभ नहीं माना जाता है।  
  • मिटटी का करवा गणेशजी का प्रतीक माना गया है,इससे चंद्रमा को अर्घ्य दें और दूसरे लोटे के पानी से व्रत खोलें। 
  • करवा साबुत और स्वच्छ होना चाहिए,टूटा या दरार वाला करवा पूजा में अशुभ माना गया है।  
  • जिस सुहाग चुन्नी को पहनकर आपने कथा सुनी,उसी चुन्नी को ओढ़कर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • इस दिन किसी की बुराई-चुगली अथवा किसी का अपमान न करें एवं लहसुन-प्याज वाला और तामसिक खाना न बनाएं।
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