{"_id":"6a992e98150edbcc3d0527c3","slug":"janmashtami-2026-vrat-rules-what-to-do-and-what-to-not-on-janmashtami-vrat-2026-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृष्ण जन्माष्टमी पर क्या है व्रत रखने के नियम और पूजा विधि, जानिए क्या खाएं और क्या नहीं ?","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
कृष्ण जन्माष्टमी पर क्या है व्रत रखने के नियम और पूजा विधि, जानिए क्या खाएं और क्या नहीं ?
Thu, 03 Sep 2026 02:13 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 03 Sep 2026 02:13 PM IST
सार
Janmashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखते हुए इसके नियमों का पालन किया जाता है।
विज्ञापन
कृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Janmashtami 2026: कल, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पर जन्माष्टमी पूरे देशभर में मनाया जाएगा। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं ,मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है और मध्यरात्रि 12 बजे कान्हा के जन्म दिन का उत्सव मनाते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा करने का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत पूरे भक्ति ,श्रद्धा, संयम और सात्विकता के साथ मनाने का विशेष महत्व होता है। जन्माष्टमी पर व्रत रखने से लेकर पूजा-पाठ तक के नियमों का विशेष ध्यान दिया जाता है। आइए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत पर क्या खाएं और क्या न खाएं, जानिए संपूर्ण पूजा विधि और नियम।
जन्माष्टमी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए
- जन्माष्टमी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। आमतौर इस व्रत में अन्न और अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। इस व्रती लोगो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत या फिर फलाहार कर सकते हैं।
- इस व्रत में केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती जैसे फल, दूध-दही, मखाना, साबूदाना, सूखे मेवे, सिंघाड़ा का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
विज्ञापन
-जन्माष्टमी व्रत के दौरान चावल, गेंहू, दाल और दूसरे अनाज आदि खाने से बचना चाहिए।
-व्रत में चावल, गेहूं, दाल, प्याज, लहसुन, मांस, मछली और अंडा, सादा नमक नहीं खाना चाहिए।
जन्माष्टमी पर क्या है कान्हा की संपूर्ण पूजन विधि
- जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और कान्हा जी का मन में ध्यान रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
- जन्माष्टमी पर सुबह घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी से साफ-सफाई करें। बाल गोपाल की मूर्ति को सुंदर कपड़े आभूषण, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से सजाएं। फिर पालने की भी सजावट करें।
- दिनभर भगवान कृष्ण के नाम, मंत्र, और भजनों का जाप करते हुए फलाहार व्रत रखें और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पाठ करें।
- जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि कान्हा के अभिषेक करने का खास महत्व होता है। इस अवसर पर निशिता काल में कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें। और चंदन, फल-फूल, मेवा, मिठाई और तुलसी अर्पित करें।
- भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, दूध, दही, फल का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें। इसके बाद मध्यरात्रि का इंतजार करते हुए भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाएं। इस रात को शंख, घंटी बजाएं और कान्हा जी पालने में झुलाएं और आरती-भजन करें।
जन्माष्टमी पर क्या न करें ?
- जन्माष्टमी के दिन न केवल अपने सात्विक भोजन का ध्यान रखें बल्कि अपने आचरण की शुद्धता का भी ध्यान रखने की परंपरा होती है। जन्माष्टमी पर किसी को अपशब्द, वाद-विवाद, अपमान करने से बचें। इस दिन पूरे घर में शांति और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।
विज्ञापन
जन्माष्टमी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए
- जन्माष्टमी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। आमतौर इस व्रत में अन्न और अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। इस व्रती लोगो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत या फिर फलाहार कर सकते हैं।
विज्ञापन
- इस व्रत में केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती जैसे फल, दूध-दही, मखाना, साबूदाना, सूखे मेवे, सिंघाड़ा का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
विज्ञापन
56 भोग थाली: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को लगाने वाले हैं 56 भोग? जानें किन चीजों को करना है शामिल
जन्माष्टमी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए ?-जन्माष्टमी व्रत के दौरान चावल, गेंहू, दाल और दूसरे अनाज आदि खाने से बचना चाहिए।
-व्रत में चावल, गेहूं, दाल, प्याज, लहसुन, मांस, मछली और अंडा, सादा नमक नहीं खाना चाहिए।
जन्माष्टमी पर क्या है कान्हा की संपूर्ण पूजन विधि
- जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और कान्हा जी का मन में ध्यान रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
- जन्माष्टमी पर सुबह घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी से साफ-सफाई करें। बाल गोपाल की मूर्ति को सुंदर कपड़े आभूषण, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से सजाएं। फिर पालने की भी सजावट करें।
- दिनभर भगवान कृष्ण के नाम, मंत्र, और भजनों का जाप करते हुए फलाहार व्रत रखें और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पाठ करें।
- जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि कान्हा के अभिषेक करने का खास महत्व होता है। इस अवसर पर निशिता काल में कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें। और चंदन, फल-फूल, मेवा, मिठाई और तुलसी अर्पित करें।
- भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, दूध, दही, फल का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें। इसके बाद मध्यरात्रि का इंतजार करते हुए भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाएं। इस रात को शंख, घंटी बजाएं और कान्हा जी पालने में झुलाएं और आरती-भजन करें।
जन्माष्टमी पर क्या न करें ?
- जन्माष्टमी के दिन न केवल अपने सात्विक भोजन का ध्यान रखें बल्कि अपने आचरण की शुद्धता का भी ध्यान रखने की परंपरा होती है। जन्माष्टमी पर किसी को अपशब्द, वाद-विवाद, अपमान करने से बचें। इस दिन पूरे घर में शांति और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।