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Holika Dahan 2024: होलिका दहन आज, जानिए इस दिन सौभाग्य के लिए क्या करें क्या न करें
Sun, 24 Mar 2024 05:17 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 24 Mar 2024 05:17 AM IST
सार
Holika Dahan 2024: होलिका दहन पर लोग अलग-अलग उपाय करते हैं परंतु इस खास दिन पर कुछ धार्मिक उपाय हैं जिनको करने से सुख-समृद्धि आती है वहीं इस दिन कुछ काम ऐसे हैं जिनको करने से परहेज करना चाहिए।
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होली की शुभकामनाएं 2024
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
Holika Dahan 2024: रंगों और सामाजिक समरसता का त्योहार होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन सारे बैर-भाव भुलाकर एक दूसरे को गले लगाया जाता है। होली के त्योहार के आरंभ से पूर्व होलिका दहन का विधान किया जाता है जो अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वैसे तो होलिका दहन पर लोग अलग-अलग उपाय करते हैं परंतु इस खास दिन पर कुछ धार्मिक उपाय हैं जिनको करने से सुख-समृद्धि आती है वहीं इस दिन कुछ काम ऐसे हैं जिनको करने से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करें और क्या न करें।
क्या न करें-
वस्त्रों का रखें ध्यान
ज्योतिष मान्यता है कि होली के दिन फटे, मैले, काले, नीले कपडे पहनने से व्यक्ति की शारीरिक क्षमता व सकारात्मक ऊर्जा का नाश होता हैं। ऐसे कपड़े हमारे तन-मन को शिथिल बनाकर कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं। साथ ही गंदे और फटे वस्त्र दुर्भाग्य लेकर आते हैं, घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता हैं। वहीं होलिका दहन के दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव ज्यादा रहता है इसलिए सफेद रंग के वस्त्र धारण करना भी अशुभ होता है। इस दिन शुभ रंगों के वस्त्र पहनें।
उधार देने से बचें
मान्यता है कि होलिका दहन के दिन किसी को पैसा उधार नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से आपको भविष्य में आर्थिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नवविवाहिता न देखें
पौराणिक मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी भी नवविवाहिता को ये अग्नि नहीं देखनी चाहिए, इसे अशुभ माना गया है। इससे उनके दांपत्य जीवन में कड़वाहट घुल सकती हैं।
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अक्सर देखा गया है कि बहुत से लोग होलिका दहन के लिए हरे पेड़ों की टहनियां तोड़ लेते है,ऐसा करना किसी भी दृष्टि से शुभ नहीं है। मान्यता है कि इस दिन होलिका दहन के लिए पीपल, बरगद या आम की लकड़ियों का प्रयोग न करें। इस मौसम में इन वृक्षों पर नई कोपलें आती हैं, ऐसे में इन्हें जलाने से नकारात्मकता फैलती है,दोष लगता है। होलिका दहन के लिए गूलर, नीम या अरंड के पेड़ की सूखी लकड़ी या गोबर के कंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
होली पर क्या करें
दांपत्य जीवन में सुख के लिए
होली का त्योहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक समय में श्रीकृष्ण और राधा की बरसाने की होली के साथ ही होली के उत्सव की शुरुआत हुई। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा कर इनको गुलाल लगाने से जीवन में प्रेम और स्नेह बना रहता है।
उत्तम स्वास्थ्य के लिए
स्वास्थ्य की दृष्टि से होलिका दहन के विधानों में आग जलाना, अग्नि परिक्रमा, नाचना, गाना आदि शामिल किए गए है। अग्नि की ताप जहां रोगाणुओं को नष्ट करती है,वहीं शरीर की ऊर्जा और स्फूर्ति कायम रहती है और शरीर स्वस्थ्य रहता है।
अग्नि की पूजा
होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं जो सभी जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं।
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क्या न करें-
वस्त्रों का रखें ध्यान
ज्योतिष मान्यता है कि होली के दिन फटे, मैले, काले, नीले कपडे पहनने से व्यक्ति की शारीरिक क्षमता व सकारात्मक ऊर्जा का नाश होता हैं। ऐसे कपड़े हमारे तन-मन को शिथिल बनाकर कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं। साथ ही गंदे और फटे वस्त्र दुर्भाग्य लेकर आते हैं, घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता हैं। वहीं होलिका दहन के दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव ज्यादा रहता है इसलिए सफेद रंग के वस्त्र धारण करना भी अशुभ होता है। इस दिन शुभ रंगों के वस्त्र पहनें।
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उधार देने से बचें
मान्यता है कि होलिका दहन के दिन किसी को पैसा उधार नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से आपको भविष्य में आर्थिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नवविवाहिता न देखें
पौराणिक मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी भी नवविवाहिता को ये अग्नि नहीं देखनी चाहिए, इसे अशुभ माना गया है। इससे उनके दांपत्य जीवन में कड़वाहट घुल सकती हैं।
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Holika Dahan Date And Time 2024: जानिए होलिका दहन की पूजाविधि, महत्व और शुभ मुहूर्त
हरी लकड़ियां न जलाएंअक्सर देखा गया है कि बहुत से लोग होलिका दहन के लिए हरे पेड़ों की टहनियां तोड़ लेते है,ऐसा करना किसी भी दृष्टि से शुभ नहीं है। मान्यता है कि इस दिन होलिका दहन के लिए पीपल, बरगद या आम की लकड़ियों का प्रयोग न करें। इस मौसम में इन वृक्षों पर नई कोपलें आती हैं, ऐसे में इन्हें जलाने से नकारात्मकता फैलती है,दोष लगता है। होलिका दहन के लिए गूलर, नीम या अरंड के पेड़ की सूखी लकड़ी या गोबर के कंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
होली पर क्या करें
दांपत्य जीवन में सुख के लिए
होली का त्योहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक समय में श्रीकृष्ण और राधा की बरसाने की होली के साथ ही होली के उत्सव की शुरुआत हुई। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा कर इनको गुलाल लगाने से जीवन में प्रेम और स्नेह बना रहता है।
उत्तम स्वास्थ्य के लिए
स्वास्थ्य की दृष्टि से होलिका दहन के विधानों में आग जलाना, अग्नि परिक्रमा, नाचना, गाना आदि शामिल किए गए है। अग्नि की ताप जहां रोगाणुओं को नष्ट करती है,वहीं शरीर की ऊर्जा और स्फूर्ति कायम रहती है और शरीर स्वस्थ्य रहता है।
अग्नि की पूजा
होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं जो सभी जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं।