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Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं जरूर करें ये काम, घर में हमेशा रहेगी सुख-समृद्धि

Mon, 05 Aug 2024 06:04 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 05 Aug 2024 06:04 AM IST
सार

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व विशेष रूप से हिंदू धर्म में है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की खुशी में मनाया जाता है।

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Hariyali Teej 2024 Kab Hai Hariyali Teej Vrat Puja Vidhi And Importance
हरियाली तीज - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन-वंदन कर झूला झूलती है,सुरीले स्वर में सावन के गीत-मल्हार गाती हैं। पूजा-अर्चना के साथ उल्लास-उमंग का यह त्योहार एक पारंपरिक उत्सव के रूप में जीवन में नए रंग भरता है। दांपत्य में प्रगाढ़ता लाता है, साथ ही परिवार और समाज को स्नेह सूत्र में बांधता है।

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धार्मिक महत्व
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व विशेष रूप से हिंदू धर्म में है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की खुशी में मनाया जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया,उससे प्रसन्न होकर शिव ने श्रावण शुक्ल तीज के दिन ही मां पार्वती को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए, इस दिन को माता पार्वती के पूजा का दिन मानते हुए, महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। 
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यह त्योहार विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने घर के सुख-समृद्धि के लिए और सुहागन के रूप में जीवन बिताने के लिए मनाती हैं। वहीं इस दिन कुंवारी कन्याएं व्रत रखकर अपने लिए शिव जैसे वर की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं,उनको सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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हरियाली तीज की पूजाविधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र-आभूषण पहनें। फिर एक स्वच्छ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर वहां एक चौकी पर माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा विधिपूर्वक शुरू करें, जिसमें सबसे पहले भगवान शिव और माता गौरी की पूजा की जाती है। इस अवसर पर हरे रंग की सजावट करें और हरे पत्ते चढ़ाएं। फल, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करें, विशेषकर फल, मेवे, और हरी चूड़ियां अर्पित की जाती हैं। पूजा के बाद हरियाली तीज की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में, पूजा समाप्त करने के बाद परिवार के साथ प्रसाद वितरित करें । यह पूजा माता गौरी की कृपा प्राप्त करने और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए की जाती है।

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तीज के दिन हरे रंग का महत्व
सावन के महीने को प्रकृति की सौंदर्यता के तौर पर देखा जाता है। धर्मग्रंथों में स्त्री को भी प्रकृति के समतुल्य ही माना गया है। प्रकृति की हरियाली की तरह स्त्रियों से भी जीवन में ख़ुशी और स्फूर्ति बनी रहती है। हरा रंग, खुशहाली, समृद्धि,उत्कर्ष,प्रेम,दया,पावनता,पारदर्शिता का प्रतीक है।

सुहागिन महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां,परिधान अपने पति की खुशहाली,तरक्की, दीर्घायु और सेहतमंद जीवन के लिए पहनती हैं। मान्यता है कि हरा रंग पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है व इस माह में ये रंग पहनने से शिव-पार्वती की कृपा बनी रहती है। इसलिए तो हरियाली तीज या हरियाली अमावस्या जैसे त्योहारों में हरे रंग के कपड़े व हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा है।

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