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Goga Navami 2025: गोगा नवमी कल, सर्प देवता की आराधना और लोक आस्था का पर्व

Sun, 17 Aug 2025 11:44 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 17 Aug 2025 11:44 AM IST
सार

गोगा नवमी, जिसे गुग्गा नवमी भी कहा जाता है, विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े हर्ष और श्रद्धा से मनाई जाती है। इस दिन गोगा जी की पूजा करके भक्त न केवल सर्पदंश से सुरक्षा पाते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं।

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goga navami 2025 date puja vidhi importance of festival and significance
गोगा नवमी 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की धरती अनेक लोकदेवताओं और वीर पुरुषों की गाथाओं से भरी हुई है। इन्हीं में से एक लोकदेवता हैं वीर गोगा जी महाराज, जिन्हें सर्पों के देवता के रूप में पूजा जाता है। गोगा नवमी, जिसे गुग्गा नवमी भी कहा जाता है, विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े हर्ष और श्रद्धा से मनाई जाती है। इस दिन गोगा जी की पूजा करके भक्त न केवल सर्पदंश से सुरक्षा पाते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। यह पर्व लोक आस्था, वीरता और भक्ति का अनूठा संगम है।
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गोगा नवमी का पर्व
गोगा नवमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है।इस साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि का प्रारंभ 16 अगस्त को रात 9 बजकर 34 मिनट पर हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 17 अगस्त को शाम 7 बजकर 24 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए गोगा नवमी का पर्व रविवार, 17 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विशेष रूप से लोकप्रिय है। गोगा जी को सर्पों का देवता माना जाता है और उनकी पूजा से सर्पदंश से रक्षा होती है। इस दिन गाँव-गाँव में गोगा जी के मंदिरों और थानों पर विशेष आयोजन होते हैं।
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गोगा जी का इतिहास और महत्व
गोगा जी का जन्म राजस्थान के ददरेवा गाँव में चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ था। उनका जीवन संघर्ष, वीरता और जनकल्याण का प्रतीक माना जाता है। गोगा जी ने अपने दिव्य बल और अलौकिक शक्ति से सर्पों को वश में किया और लोगों को उनकी पीड़ा से बचाया। इसी कारण वे लोकदेवता और सर्पों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।


गोगा नवमी की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। पूजा स्थल को गोबर से लीपकर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। गोगा जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उन्हें जल अर्पित किया जाता है। तत्पश्चात हल्दी, रोली और चावल से तिलक कर पुष्प चढ़ाए जाते हैं। धूप, दीप जलाकर आरती की जाती है और मिष्ठान्न का भोग अर्पित किया जाता है। विशेष रूप से चूरमा का भोग गोगा जी को समर्पित कर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

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गोगा नवमी की पूजा का महत्व
गोगा नवमी पर की गई पूजा से घर-परिवार को सर्पदंश से सुरक्षा मिलती है। इसके साथ ही जीवन में शांति, सुख और समृद्धि का आगमन होता है। गोगा जी की आराधना यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति और निस्वार्थ भाव से किए गए कार्यों का फल अवश्य मिलता है। यही कारण है कि गोगा नवमी लोक आस्था और श्रद्धा का एक प्रमुख पर्व माना जाता है।

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