वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस पावन दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। गंगा में स्नान करने जाने से पहले मां गंगा को प्रणाम करना चाहिए। हमें हमेशा जल धारा या सूर्य की ओर मुंह करके ही स्नान करना चाहिए। गंगा में जब भी डुबकी लगाएं तो इन तीन डुबकियों को लगाना कभी न भूलें। एक डुबकी देवी—देवताओं के नाम से, एक अपने पुरखों के नाम से और एक अपने परिवार के नाम से जरूर लगाएं।
Ganga Saptami 2019 : गंगा स्नान के समय जरूर जपें पापों से मुक्ति और पुण्य दिलाने वाला दिव्य मंत्र
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पृथ्वी पर तमाम तीर्थों में नदी तीर्थ का अपना विशेष स्थान है। हमारे यहां नदियों को माता के रूप में माना गया है। एक पावन तिथि पर एक विशेष घड़ी में इन नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में गंगा सप्तमी अर्थात् मां गंगा के अवतरण वाले दिन गंगा जी में स्नान करते समय इस मंत्र का जाप आपकी सभी मनोकामना को पूर्ण करता हुआ मोक्ष प्रदान करता है —
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।
किसी भी पवित्र नदी में स्नान करते समय इस दिव्य मंत्र का जाप साधक को सभी तरह के कार्यों में सफलता प्रदान करता है। चूंकि गंगा सप्तमी के दिन ही मां गंगा पृथ्वी पर आईं थी, इसलिए इस पावन तिथि पर मोक्ष की कामना लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के तमाम प्रसिद्ध गंगा घाटों पर जाकर आस्था की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि इस शुभ तिथि पर इस पावन नदी में डुबकी लगाने वाले को पतित पावनी मां गंगा सभी पापों से मुक्त करते हुए अक्षय पुण्य प्रदान करती हैं।
गंगा का मंत्र
गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की कृपा और पापों से मुक्ति पाने के लिए इस विशेष मंत्र का पाठ अवश्य करें। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इस मंत्र का जाप पापों से मुक्त करता हुआ जीवन को मंगलमय बनाता है।
“गंगागंगेति योब्रूयाद् योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्व पापेभ्यो विष्णुलोकं सगच्छति। तीर्थराजाय नमः”
तन और मन को पवित्र करने वाली मां गंगा नदी में स्नान का तो विशेष फल मिलता ही है, महज दर्शन से ही साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसीलिए पुण्यसलिला मां गंगा को लेकर कहा भी गया है —
गंगे तव दर्शनात् मुक्ति।