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गोपाष्टमीः गाय की सेवा कर ऐसे बनें भाग्यशाली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 08 Nov 2016 04:29 PM IST
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गाय की सेवा कर पुण्य के भागी बनें
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व गोपाष्टमी मंगलवार को गाय माता की सेवा कर मनाया गया। ममतामयी त्याग, बलिदान और आत्मीयता के जैसे गुणों के चलते गाय को विश्वमाता कहा जाता है। जंगल में जंगली जानवरों से सामना होने पर गाय खुद की जान जोखिम में डाल देती है और झुंड बनाकर अपने पालक और रक्षक को घेरकर उनकी जान बचाती है। ये बातें बात बालयोगी अरुण चैतन्यपुरी ने कहीं। वह कानपुर के गुजैनी स्थित रामलीला मैदान में जनजागृति मंच की ओर से गोपाष्टमी पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने गाय का महत्व बताते हुए पालकों से दूध प्राप्त करने के बाद गाय को न छोड़ने की अपील की। कार्यक्रम में 51 गायों की रोचना, आरती और पूजन कर चारा दिया गया। इस मौके पर गाय की रक्षा का लोगों ने संकल्प लिया।
गाय की सेवा से सौभाग्य की वृध्दि होती है
शास्त्रों में गोपाष्टमी पर्व पर गायों की विशेष पूजा करने का विधान निर्मित किया गया है। इसलिए कार्तिक माह की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को प्रात:काल गौओं को स्नान कराकर, उन्हें सुसज्जित करके गन्ध पुष्पादि से उनका पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात यदि संभव हो तो गायों के साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए कहते हैं ऎसा करने से प्रगत्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। गायों को भोजन कराना चाहिए तथा उनकी चरण को मस्तक पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से सौभाग्य की वृध्दि होती है।
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गाय की सेवा से सौभाग्य की वृध्दि होती है
शास्त्रों में गोपाष्टमी पर्व पर गायों की विशेष पूजा करने का विधान निर्मित किया गया है। इसलिए कार्तिक माह की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को प्रात:काल गौओं को स्नान कराकर, उन्हें सुसज्जित करके गन्ध पुष्पादि से उनका पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात यदि संभव हो तो गायों के साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए कहते हैं ऎसा करने से प्रगत्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। गायों को भोजन कराना चाहिए तथा उनकी चरण को मस्तक पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से सौभाग्य की वृध्दि होती है।
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