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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Chhath Puja 2022 chhathi maiya ki aarti jai chhat maiya lyrics in hindi

Chhath Mata Aarti Lyrics: 'जय छठी मईया...' इस आरती के बिना अधूरी है छठ माता की पूजा

Sat, 29 Oct 2022 08:11 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sat, 29 Oct 2022 08:11 AM IST
सार

Chhath Mata Aarti Lyrics:  छठ पर्व का मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है, लेकिन ये पर्व चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तिथि को प्रातः सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद समाप्त किया जाता है। छठ पूजा को तभी सफल और पूर्ण माना जाता है, जब छठ माता की आरती की जाती है।

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Chhath Puja 2022 chhathi maiya ki aarti jai chhat maiya lyrics in hindi
छठ मईया की आरती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chhath Puja Aarti: छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है। 28 अक्तूबर से शुरू हुआ ये महापर्व 31 अक्तूबर को समाप्त होगा। छठ महापर्व नहाय-खाय से आरंभ होता है और खरना के पश्चात व्रत शुरू किया जाता है। 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए इस व्रत को रखा जाता है। इस दौरान व्रती चौबीस घंटो से अधिक समय तक निर्जल व्रत रखता है। छठ पर्व का मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है, लेकिन ये पर्व चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तिथि को प्रातः सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद समाप्त किया जाता है। छठ पूजा को तभी सफल और पूर्ण माना जाता है, जब छठ माता की आरती की जाती है। यहां छठ माता की आरती लिरिक्स दी जा रही है- 

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छठ मईया की आरती

जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

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