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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Bhasma Holi 2023 in Varanasi Know the importance and date of Bhabhut aur Masaan holi in Hindi

Bhasma Holi 2023: वाराणसी में बहुत उत्साह के साथ खेली जाती है भस्म होली, जानें क्या है इसका महत्व

Sat, 04 Mar 2023 02:53 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 04 Mar 2023 02:53 PM IST
सार

मणिकर्णिका घाट पर बाबा अपने गणों के साथ चिता भस्म की होली खेलते हैं। जिसे मसान होली, भस्म होली और भभूत होली के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह होली आज यानि 4 मार्च को खेली जा रही है।

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Bhasma Holi 2023 in Varanasi Know the importance and date of Bhabhut aur Masaan holi in Hindi
चिता भस्म की होली। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

Bhasma Holi 2023: रंगभरी एकदशी के अगले दिन वाराणसी में भभूत होली या मसान होली खेली जाती है। काशी में होली का विशेष महात्मय है।  मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ अपनी नगरी के भक्तों व देवी देवताओं संग अबीर गुलाल संग होली खेलते हैं। और इसके अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर बाबा अपने गणों के साथ चिता भस्म की होली खेलते हैं। जिसे मसान होली, भस्म होली और भभूत होली के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह होली आज यानि 4 मार्च को खेली जा रही है। आइए जानते हैं भस्म होली के महत्व के बारे में। 
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क्यों मनाई जाती है भस्म होली 
हिंदु धर्म शास्त्रों  के अनुसार होली के इस उत्सव में बाबा विश्वनाथ की नगरी में देवी देवता, यक्ष, गन्धर्व सभी शामिल होते हैं। और भगवान भोलेनाथ के प्रिय गण यानि भूत पिशाच या प्रेतात्माएं खुद इंसानों के बीच जाने से रोककर रखते हैं। कहते हैं अपनी गणों के लिए भोलेनाथ उनके बीच होली खेलने के लिए घाट पर आते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि चिता की राख से होली खेलने मसान आते हैं। 
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कैसे खेली जाती है चिता भस्म होली 
  • चिता भस्म होली काशी के मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के बीच मनाया जाता हैं। 
  • इस आयोजन में सबसे पहले बाबा महाश्मशान नाथ और माता मशान काली की मध्याह्न आरती की जाती है। 
  • इसके बाद बाबा व माता को चिता भस्म  और गुलाल  चढ़ाया जाता है। 
  • इसके बाद चिता भस्म होली प्रारंभ होती है। 
  • मान्यताओं के अनुसार बताया जाता है कि बाबा विश्वनाथ दोपहर के समय मणिकर्णिका घाट पर स्नान के लिए आते हैं। 
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