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Bhai Dooj 2024: भाई दूज के दिन बहन-भाई को जरूर करना चाहिए ये काम, शास्त्रों में है उल्लेख
Sat, 02 Nov 2024 12:23 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sat, 02 Nov 2024 12:23 PM IST
सार
हिंदू धर्म में भाई दूज का विशेष महत्व है। यह दिन भाई बहन के प्यार और स्नेह के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। सभी दुःखों का नाश करने के लिए भाई बहन को इस दिन यह काम जरूर करना चाहिए।
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bhai dooj
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
Bhai Dooj 2024: यम द्वितीया यानी भाई दूज का पर्व हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है। देशभर में भाई दूज के पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह दिन भाई बहन के प्यार और स्नेह के रिश्ते का प्रतीक है। हिंदू धर्म में भाई दूज का विशेष महत्व है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से भाई का टीका करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भाई-बहन के ऊपर से अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है।
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इस साल 3 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुबह में 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। ऐसे में भाई दूज के दिन पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त 11:45 मिनट तक रहने वाला है। शास्त्रों में इस त्योहार का बड़ा महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन यमराज भी अपनी बहन यमुना के घर जाते हैं और सत्य, संतुलन, धर्म, अनुशासन और न्याय का आशीर्वाद लेते हैं।
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शास्त्रों के अनुसार सभी पापों के नाश व धर्म की पुर्नस्थापना के लिए भी इस दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन जिन लोगों की मृत्यु होती है उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार भाई दूज को शुरू करने का श्रेय यमुना जी को जाता है। इस दिन यमुना जी की पूजा और स्नान का बड़ा महत्व बताया जाता है। इस दिन जो बहन-भाई यमुना में स्नान करते हैं, उनके सभी दुखों का नाश हो जाता है और यश, कीर्ति, विद्या, धन की प्राप्ति होती है।
यम द्वितीया के दिन भाई को वस्त्र, आभूषण, फल, पकवान, शुद्ध मिठाई और दक्षिणा भेंट के रूप में बहन को देना चाहिए। वहीं बहन को भाई को अपने घर आमंत्रित करना चाहिए और उनका टीका कर दीर्घायु की कामना कर आशीर्वाद प्रदान करना चाहिए।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।