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Chhath Puja 2024: कैसे हुई छठ पूजा की शुरुआत? जानें रामायण और महाभारत से कैसे जुड़ा है इसका इतिहास

Tue, 05 Nov 2024 08:17 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 05 Nov 2024 08:17 AM IST
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Chhath Puja 2024 history significance how is chhath puja related to ramayana and mahabharata
Chhath Puja 2024 - फोटो : Amar Ujala

Chhath Puja History And Significance: हिंदू धर्म में छठ पर्व का बड़ा महत्व है। मुख्यतौर पर छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। हालांकि अब छठ पर्व बड़े पैमाने पर देशभर के विभिन्न राज्यों में भी मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का विधान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा का प्रारंभ कब से हुआ? सूर्य की आराधना कब से शुरू हुई? अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं। दरअसल, इसके बारे में पौराणिक कथाओं से जानकारी मिलती है।



पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में भगवान श्रीराम, द्वापर में दानवीर कर्ण और द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी। इसके अलावा छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक कथा राजा प्रियंवद की भी है, जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। ऐसे में आइए जानते हैं सूर्य उपासना और छठ पूजा का इतिहास।

Chhath Puja 2024 history significance how is chhath puja related to ramayana and mahabharata
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik

1. पुत्र के प्राण की रक्षा के लिए की थी छठ पूजा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियंवद नि:संतान थे। उन्होंने महर्षि कश्यप को अपना दुख बताया। ऐसे में महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इस दौरान यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर राजा प्रियंवद की पत्नी मालिनी को खाने के लिए दी गई थी। इसके सेवन से रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन उनका पुत्र मृत पैदा हुआ था।

यह देखकर राजा बहुत दुखी हुए और मृत पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और अपना प्राण भी त्यागने लगे। तभी ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और राजा प्रियंवद से कहा, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मेरा नाम षष्ठी भी है। तुम मेरी पूजा करो और लोगों के बीच प्रचार-प्रसार करो। इसके बाद राजा प्रियंवद ने पुत्र की कामना करते हुए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर विधि-विधान से माता का व्रत किया। इसके फलस्वरूप राजा प्रियंवद को पुत्र प्राप्त हुआ।

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Chhath puja 2024 - फोटो : freepik

2. श्रीराम और सीता ने भी की थी सूर्य की उपासना
पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे। लेकिन भगवान राम पर रावण के वध का पाप था, जिससे मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ कराया गया। तब ऋषि मुग्दल ने श्रीराम और माता सीता को यज्ञ के लिए अपने आश्रम में बुलाया।

मुग्दल ऋषि के कहे अनुसार, माता सीता ने कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना की और व्रत भी रखा। इस दौरान राम जी और सीता माता ने पूरे छह दिनों तक मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर पूजा-पाठ किया। इस तरह छठ पर्व का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।

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Chhath puja 2024 - फोटो : freepik

3. द्रौपदी ने रखा था छठ व्रत
पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ व्रत के प्रारंभ को द्रौपदी से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि द्रौपदी ने पांच पांडवों के बेहतर स्वास्थ्य और सुखी जीवन लिए छठ व्रत रखा था और भगवान सूर्य की उपासना की थी। इसी के परिणामस्वरूप पांडवों को उनका खोया हुए राजपाट वापस मिला था।
 

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Chhath puja 2024 - फोटो : freepik

4. दानवीर कर्ण ने की थी सूर्य पूजा
महाभारत के अनुसार, दानवीर कर्ण सूर्य के पुत्र थे। वह प्रतिदिन सूर्य की उपासना करते थे। इस प्रकार देखा जाए तो सबसे पहले कर्ण ने ही सूर्य की उपासना शुरू की थी। वह प्रतिदिन स्नान के बाद नदी में जाकर सूर्य को अर्घ्य दिया करते थे।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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