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Baisakhi 2019: बैशाखी पर्व मनाने की क्या है परंपरा और महत्व

Sun, 14 Apr 2019 02:07 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 14 Apr 2019 02:07 PM IST
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Baisakhi 2019 significance and  importance of baisakhi festival
बैशाखी का त्योहार
सिख समुदाय का महत्वपूर्ण पर्व बैशाखी 13 और 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। बैशाखी का त्योहार फसलों के तैयार होने और खालसा पंथ की स्थापना के रूप में मनाई जाती है। आइए जानते हैं बैशाखी पर्व का महत्व।
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खालसा पंथ की हुई थी स्थापना
जिस कारण बैसाखी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है वह खालसा पंथ की स्थापना है। गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में इसी दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी। पंथ की स्थापना का उद्देश्य समाज को शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके जीवन को श्रेष्ठ बनाना था।
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 सिख पंथ के प्रथम गुरु नानकदेव ने भी वैशाख माह की आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से काफी प्रशंसा की है, इसलिए पंजाब और हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में बैसाखी मनाने के आध्यात्मिक सहित तमाम अन्य कारण भी हैं। गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु के बलिदान के बाद, धर्म की रक्षा के लिए बैसाखी के दिन अलग-अलग जातियों, धर्मों और क्षेत्रों से चुनकर पंच प्यारों को अमृत छकाया। 
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बैसाखी का हिन्दू धर्म से संबंध
अधिकांश पर्व-त्योहार मौसम, मौसमी फसल और उनसे जुड़ी गतिविधियों से ही संबंधित हैं। भारत में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए हैं। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को वैशाख कहते हैं। इस प्रकार वैशाख मास के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है और पर्व के रूप में माना गया है। 


बैसाखी का महत्व
बैसाखी अप्रैल में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इसी समय सूर्य की किरणें गर्मी का आगाज करती हैं। इन किरणों के प्रभाव से जहां रबी की फसल पक जाती है, वहीं खरीफ की फसल का मौसम शुरू हो जाता है। इस पर्व की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता भी काफी है। लोग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां बैसाखी के रूप में उल्लास का रंग दिखता है, तो उत्तर-पूर्वी भारत के असम आदि राज्यों में बिहू पर्व मनाया जाता है।

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