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विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस विशेष: कस्तूरी मृग के लिए जीवन रक्षक बना ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क
Wed, 03 Mar 2021 11:20 AM IST
Krishan Singh
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 03 Mar 2021 11:20 AM IST
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कस्तूरी मृग
- फोटो : अमर उजाला
2014 में विश्व धरोहर का खिताब अपने नाम करने वाला ग्रेट हिमायलन नेशनल पार्क दुर्लभ कस्तूरी मृग के लिए रक्षक साबित हो रहा है। 24 वर्षों में दुर्लभ प्रजाति में शुमार कस्तूरी मृग की संख्या में रिकार्ड वृद्धि हुई है। इनकी संख्या पांच गुना से भी अधिक बढ़ी है। पार्क में कस्तूरी मृग सहित किसी भी वन्यप्राणी का शिकार करना अवैध है। इसके लिए पार्क प्रबंधन ने संवेदनशील जगहों पर ट्रैप कमरे लगा रखे हैं। यही वजह है कि विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए सुरक्षित जगह बन गई है।
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1997 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कस्तूरी मृग का औसतन संख्या घनत्व प्रति किलोमीटर दो था। 13 वर्षों में 2010 तक यह दायरा बढ़कर प्रति किलोमीटर दस हो गया है। 2019 में इनकी संख्या में दस से बढ़कर 11 हो गई है। ताजा सर्वे में भी कस्तूरी मृगों की संख्या में वृद्धि पाई गई है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के एसीएफ सचिन शर्मा ने कहा कि पार्क में कस्तूरी मृग सहित अन्य वन्यप्राणियों के सुरक्षा संरक्षण के लिए उचित कदम उठाए गए हैं। पार्क के संवदेनशील जगहों पर करीब 35 ट्रैप कैमरों को लगाया गया है।
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एक दर्जन से अधिक जगहों पर कस्तूरी मृग का वास
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में करीब तीन हजार फीट की ऊंचाई पर कस्तूरी मृग पाए जाते हैं। पार्क में एक दर्जन से अधिक जगह ऐसी है जहां कस्तूरी मृग का वास पाया गया है।
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नर कस्तूरी मृग के वर्ग के पेट में कस्तूरी पाई जाती है। कस्तूरी के महंगे दाम मिलने से लोग इसका शिकार करते हैं। लेकिन अब वन्य प्राणियों का शिकार करने के लिए कानून सख्त होने से भी शिकार में कमी आई है।