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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   World Senior Citizens Day: Himachal's elderly are living their old age with their families, not in old age hom

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस: वृद्ध आश्रमों में नहीं, परिवारजनों के साथ बुढ़ापा जी रहे हिमाचल के बुजुर्ग

Thu, 21 Aug 2025 10:57 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 21 Aug 2025 10:57 AM IST
सार

कभी वृद्धाश्रम जीवन की अंतिम मंजिल माने जाते थे, लेकिन हिमाचल में बुजुर्गों के लिए घर ही सबसे सुरक्षित ठिकाना है। 

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World Senior Citizens Day: Himachal's elderly are living their old age with their families, not in old age hom
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश में ऐसे बहुत कम घर होंगे जो वरिष्ठ नागरिकों के गरिमामयी बुढ़ापे की कहानी बयां न करते हों। कभी वृद्धाश्रम जीवन की अंतिम मंजिल माने जाते थे, लेकिन हिमाचल में बुजुर्गों के लिए घर ही सबसे सुरक्षित ठिकाना है। देश के अन्य हिस्सों में जहां वृद्धाश्रमों की मांग बढ़ रही है, वहीं हिमाचल में यह अलग तस्वीर पेश करता है। हिमाचल में घर ही परिवारजन बुजुर्गों को सहेज कर रख रहे हैं। प्रदेश में संचालित नौ वृद्ध आश्रमों में मात्र 228 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें भी अधिकांश बाहरी राज्यों के हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु की साढ़े सात लाख आबादी को जीवन यापन करने के लिए सरकार हर माह सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी दे रही है। स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं में भी इन्हें अधिमान मिल रहा है।  प्रदेश में 74 वर्ष औसतन आयु आंकी गई है। हिमाचल की स्वच्छ हवा-पानी, शुद्ध खानपान और आदर्श जीवन से लंबी उम्र जीकर बुजुर्ग अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन रहे हैं।

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हिमाचल प्रदेश के अधिकांश 60 वर्ष से अधिक आयु के महिला और पुरुष आज भी अपने परिवार के साथ बैठकर चूल्हे की आग के सामने पुराने किस्से दोहराते हैं। 92 फीसदी वरिष्ठ नागरिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। शहरों में नौकरी करने के बाद भी अधिकांश बुजुर्ग अपने मूल क्षेत्रों का रुख करते हैं। हिमाचल में एक सामाजिक विश्वास है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यही वजह है कि यहां के लोग वृद्ध माता पिता को बोझ नहीं समझते। 21 अगस्त को हर साल वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर जब देश भर में बुजुर्गों को सम्मान देने और उनके योगदान को याद करने की परंपरा निभाई जाती है, वहीं हिमाचल की कहानी बताती है कि यहां किस प्रकार से संस्कारों और संवेदनाओं से बुजुगों को सहेजना ही सच्ची सामाजिक सुरक्षा है।

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यहां की प्राकृतिक आबोहवा, शुद्ध खानपान और संतुलित जीवनशैली ने प्रदेश के बुजुर्गों को लंबा, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने का अवसर दिया है। यहां के लोग 90 से 100 वर्ष तक की उम्र तक स्वस्थ जीवन जीते हैं और कई तो 100 पार भी कर चुके हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदूषण कम है, जिससे सांस की बीमारियां बहुत कम देखने को मिलती हैं। ताजे फल-सब्जियां, देसी घी, घर का बना दही और दूध नियमित आहार का हिस्सा होते हैं। अधिकांश बुजुर्ग आज भी खेतों में हल चलाते, मवेशियों की देखभाल करते और घर के छोटे-मोटे काम खुद करते दिखते हैं। यह नियमित शारीरिक गतिविधि उनके शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखती है।

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4,000 से अधिक बुजुर्ग पार कर रहे सौ साल की आयु
प्रदेश में 4,000 से अधिक बुजुर्ग 100 साल की आयु का आंकड़ा भी पार रहे हैं। किन्नौर के श्याम शरण नेगी देश के पहले मतदाता के तौर पर विख्यात रहे हैं। नवंबर 2022 में 105 वर्ष की आयु में इनका निधन हुआ था। 1951 से 2022 तक नेगी ने लगातार 34वां बोट डाला था। पूर्व डीजीपी 92 वर्षीय आरआर वर्मा आज भी रोजाना माल रोड शिमला की सैर करते हैं। 15 अगस्त को आरआर वर्मा ने रिज मैदान पर पहाड़ी नाटी कर सबका मन मोह लिया।

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