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Himachal News: एम्स बिलासपुर में अगले साल ही मिलेगी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा, जानें वजह
Sat, 04 Nov 2023 09:48 AM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 04 Nov 2023 09:48 AM IST
सार
एम्स बिलासपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अभी मरीजों को इंतजार करना होगा। उपकरण खरीद के लिए चल रही प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। एम्स के अनुसार उपकरणों की खरीद और उन्हें स्थापित करने में अभी 9 माह का समय लगेगा।
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बिलासपुर एम्स
- फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अभी मरीजों को इंतजार करना होगा। उपकरण खरीद के लिए चल रही प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। एम्स के अनुसार उपकरणों की खरीद और उन्हें स्थापित करने में अभी 9 माह का समय लगेगा। इसके बाद यह सुविधा शुरू की जाएगी। एम्स बिलासपुर में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा देने के लिए पिछले साल दिसंबर में कवायद शुरू की गई थी। एम्स प्रबंधन ने इसी साल किडनी ट्रांसप्लांट को शुरू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल पाने से उपकरणों की खरीद शुरू नहीं हो पाई।
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अब एक बार फिर मंजूरी लेने की प्रक्रिया को शुरू किया गया है। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने बिलासपुर के दौरे के दौरान एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की समीक्षा की थी। उन्होंने भी इस प्रक्रिया को पूरा कराने का आश्वासन दिया है। किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा के लिए एम्स बिलासपुर में पहले डोनर प्रोग्राम भी शुरू किया जाएगा। इसके तहत ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए विशेष ओपीडी में मरीजों को चिह्नित किया जाएगा। इसमें मरीज और किडनी देने वाले दोनों का परीक्षण किया जाएगा।
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बता दें कि आईजीएमसी शिमला में पांच किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, लेकिन 23 अगस्त 2021 के बाद वहां भी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हुआ है। अब एम्स प्रबंधन ने 9 माह में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने का दावा किया है। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में यह सुविधा न होने पर मरीजों को अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था। चंडीगढ़ के पीजीआई या दिल्ली एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीज को कई गुना ज्यादा खर्च करना पड़ता है। इलाज पूरा होने के लिए कई दिन तक अस्पताल में रहना होता है। डायलिसिस बार-बार होने के कारण मरीज पर और अधिक आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। एम्स में ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलने के बाद बड़ी राहत मिलेगी।
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