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आपदा के जख्म: तुर्किये, पाकिस्तान से आया पश्चिमी विक्षोभ लाया तबाही, हिमालय के फुटहिल तक पहुंचा मानसून

Wed, 16 Aug 2023 04:19 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 16 Aug 2023 04:19 PM IST
सार

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाला मानसून इस बार हिमालय के फुटहिल तक पहुंच गया। अमूमन ऐसा नहीं होता है।

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western disturbance with Monsoon makes intense rainfall in himachal leads to devastation
हिमाचल में बारिश से तबाही। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूरोपीय देशों को पार कर तुर्किये, ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिमाचल पहुंचे पश्चिमी विक्षोभ ने मानसून से जुगलबंदी कर तबाही का तांडव रचा। हिमाचल में अकेले मानसून ने ही हाहाकार नहीं मचाया है, बल्कि पश्चिम से आए विक्षोभ की अतिसक्रियता से देवभूमि के भंगुर पहाड़ दोहरे घिर गए। विक्षोभ अंध (अटलांटिक) महासागर से उठता है। उत्तरी अंध महासागर से उठी आर्द्र तूफानी हवाओं ने अपने साथ भूमध्य, कैस्पियन और कालासागर से नमी जोड़ी।

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दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाला मानसून इस बार हिमालय के फुटहिल तक पहुंच गया। अमूमन ऐसा नहीं होता है। तबाही के इस मंजर में सबके जहन में एक ही सवाल है कि हिमाचल में इस बार इतनी भारी तबाही क्यों हो रही है? इस बार मानसून 24 जून को हिमाचल पहुंचा, पर उससे पहले ही पश्चिमी विक्षोभ खूब बारिश कर रहा था।
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मई से ही भारी बारिश का दौर शुरू हो गया था। कई वर्षों से मानसून से पूर्व ऐसी बारिश कभी नहीं हुई। इसी से अगले संकेत भी मिल गए थे। विक्षोभ के यही तेवर मानसून की चरम अवस्था में भी बने हुए हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का जैसे डबल इंजन काम रहा है।
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मानसून पूरे आवेश में हिमालयीय क्षेत्र में फुटहिल तक पहुंच गया है, जो आमतौर पर मैदानी क्षेत्रों तक ही पहुंच पाता था। पश्चिमी विक्षोभ ने इसे दोहरी ताकत दे दी है। मानसून के लिए इस बार करीब एक किलोमीटर का लो प्रेशर एरिया बना है। यह भी सामान्य से ज्यादा है। प्रदेश में सामान्य से अत्यधिक बारिश का यही कारण है। भारी बारिश के ग्लोबल कारण भी हैं। - सुरेंद्र पाल निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला

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