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गर्भवती को कुर्सी पर बैठा 18 किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल

Mon, 17 Feb 2020 11:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूली (कुल्लू)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूली (कुल्लू) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 17 Feb 2020 11:00 AM IST
सार

  • सैंज के बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र में सड़क न अस्पताल 
  • चार गांवों में मोबाइल सिग्नल तक नहीं 
  • डेढ़ माह में ऐसा चौथा मामला 
  • बीते दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की गई थी जान

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Villagers walk for 18 kilometer to get pregnant woman to hospital in Kullu in Himachal Pradesh
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सड़क और अस्पताल न होने से गांव के लोगों को गर्भवती महिला को कुर्सी पर बैठाकर 18 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाना पड़ा। मामला शाक्टी गांव का है। रविवार सुबह करीब दस बजे सुनीता देवी (27) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सुनीता के पति देवेंद्र कुमार और परिजन परेशान हो गए कि अस्पताल कैसे पहुंचा जाए।

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परिवार वालों ने गांव वालों की मदद ली और एक कुर्सी को लकड़ी के डंडों से बांध दिया। सुनीता को कुर्सी पर बैठाया और खड़े और उतराई वाले बर्फीले रास्ते से करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर पांच घंटे बाद निहानी तक पहुंचाया। यहां से सुनीता को गाड़ी से सैंज अस्पताल पहुंचाया जहां उन्हें उपचार दिया जा रहा है।

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Villagers walk for 18 kilometer to get pregnant woman to hospital in Kullu in Himachal Pradesh

उल्लेखनीय है कि डेढ़ महीने के भीतर इस तरह का यह चौथा मामला है। गाड़ापारली पंचायत से दो और रैला पंचायत से महिला को भी कुर्सी में उठाकर सड़क तक पहुंचाया गया था। बीते दिनों पोलियो की दवा पिलाने जा रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्फीले रास्ते में फिसलकर खाई में गिरने से जान जा चुकी है।

बावजूद इसके सरकार और प्रशासन खामोश हैं। सुनीता के पति देवेंद्र कुमार, पंचायत प्रधान भाग चंद, उप प्रधान गोपाल आदि ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सैंज घाटी के दूरस्थ गांव शुगाड़, शाक्टी, मरौड और कुटला को सड़क भी नसीब नहीं हुई है। लोग मरीजों को ही नहीं, अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं को भी पीठ पर उठाकर लाने को मजबूर हैं।

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