विजिलेंस जांच में हुआ खुलासा, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक और एजेंट में हुई थी डील
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कोरोना योद्धाओं के लिए मास्क, ग्लव्ज, थर्मल स्कैनर और पीपीई किट जैसे उपकरणों की खरीद की पेमेंट रिलीज करने के लिए पांच लाख के लेनदेन से जुड़े वायरल ऑडियो की जांच में जुटी विजिलेंस को अहम सुबूत मिले हैं। अब तक की जांच में स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता और सामान सप्लाई के दौरान एजेंट की भूमिका निभाने वाले शख्स के दावे गलत साबित हो रहे हैं। दोनों ने ऑडियो में अपनी आवाज को तो स्वीकारा, लेकिन पैसे का लेनदेन न होने का दावा किया था।
उधर, विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि टीम के हाथ कुछ ऐसे तथ्य लगे हैं, जिनसे दोनों के लेनदेन न होने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। दोनों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ शुरू की है। विभिन्न जगह के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और दोनों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन ट्रैक किए जा रहे हैं। दोनों की लोकेशन कई बार एक साथ होने की जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि डील उसी दिन हुई, जिस दिन फोन पर रिकॉर्डिंग की गई। ऐसे में अब विजिलेंस दोनों की मुलाकात के स्थान और डील को लेकर छानबीन में जुटी है।
कुंदन बनकर निकलूंगा : बिंदल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के बाद डॉ. राजीव बिंदल का एक वीडियो सामने आया है। इसमें बिंदल ने कहा कि सत्य बलवान होता है। सत्य की अग्निपरीक्षा भी होती है। उन्हें विश्वास है कि इस परीक्षा में वह कुंदन बनकर निकलेंगे।
ऊपर के नेताओं से शुरू हो रहा भ्रष्टाचार : शांता
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का मामला, एक अधिकारी की गिरफ्तारी और उसके तुरंत बाद केंद्रीय नेताओं का संज्ञान लेना, फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का त्यागपत्र देना हिमाचल के इतिहास की असाधारण ऐतिहासिक घटना है। शांता ने कहा कि भ्रष्टाचार ऊपर के नेताओं से शुरू हो रहा है।
बिंदल का इस्तीफा भाजपा की अंतर्कलह से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास : वीरभद्र
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश सरकार की छत्रछाया में व्याप्त भ्रष्टाचार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में रिश्वत लेने के आरोप में स्वास्थ्य निदेशक की गिरफ्तारी से साफ है कि इसके तार सीधे भाजपा के बड़े नेताओं से जुड़े हैं। भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल का इस्तीफा भाजपा के भीतर जो अंतर्कलह चल रही है, उससे लोगों का ध्यान हटाने का असफल प्रयास है।
इस गड़बड़झाले ने भाजपा की कथित ईमानदारी की पोल खोल दी है। कहा कि 60 साल के राजनीतिक कॅरिअर में उन्होंने ऐसा दौर नहीं देखा, जब ऐसी विपदा के समय कोई राजनीतिक दल संगीन भ्रष्टाचार के आरोप में संलिप्त पाया जाए। मुख्यमंत्री को इसकी जांच सिटिंग जज से करवानी चाहिए।