दलाईलामा से ट्रंप की दूरी पाटेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा से जो दूरी बनाए रखी, उसे अब अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन पाट सकते हैं। मैक्लोडगंज स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार और तिब्बती समुदाय को विश्वास है कि अमेरिका के रुख में बदलाव होगा और दलाईलामा को फिर व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया जाएगा। ओबामा सरकार के कार्यकाल के दौरान उपराष्ट्रपति रहते हुए बाइडन दलाईलामा से अमेरिका में कई बार मिल चुके थे। चुनाव प्रचार के दौरान भी बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के बाद तिब्बत मसले को समर्थन देने के साथ दलाईलामा से मिलने की बात कही थी।
निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसंग सांग्ये ने कहा कि बाइडन के नेतृत्व में तिब्बत मुद्दे को और समर्थन मिलने की उम्मीद है। बाइडन ने कहा है कि वह दलाईलामा को अमेरिका में आमंत्रित करेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोंछे कहते हैं कि बाइडन उपराष्ट्रपति रहते हुए भी दलाईलामा से अमेरिका में चार-पांच बार मिल चुके हैं। यह तिब्बत मसले के हल के लिए अच्छे संकेत हैं। निर्वासित तिब्बत संसद के उपाध्यक्ष येशी फुंचोक के अनुसार उन्हें आशा है बाइडन दलाईलामा से मिलने का वादा निभाएंगे। निर्वासित तिब्बत सरकार में पदाधिकारी रहे वांगचुक कहते हैं कि जो बाइडन का तिब्बत मसले के प्रति नरम रुख रहने की उम्मीद है।
डेमोक्रेटिक पार्टी का रुख रहा है नरम
तिब्बत को लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के डीन डॉ. प्रदीप नायर कहते हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी तिब्बत मसले पर हमारे पक्ष में रही है। ओबामा का स्टैंड भी सहानुभूतिपूर्वक रहा है। अमेरिका तिब्बत मसले पर हमेशा कूटनीतिक रूप से आगे चलता है। हालांकि, बाइडन ने पहले से कहा है कि वह सबको साथ लेकर चलेंगे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी एक बार भी दलाईलामा से नहीं मिले
दो बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी एक बार भी दलाईलामा से नहीं मिले हैं। मैक्लोडगंज में निर्वासित तिब्बत सरकार को केंद्र ने कभी भी आधिकारिक मान्यता नहीं दी। पूर्व सीएम शांता कुमार के अलावा भाजपा और कांग्रेस के कई सांसदों ने दलाईलामा को भारत रत्न देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कुछ नहीं किया।