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संचालकों को सरकार से मदद की आस: बीबीएन में कच्चा माल महंगा होने से बंद हो गए दो दर्जन गत्ता उद्योग

Tue, 05 Apr 2022 11:21 AM IST
Krishan Singh ओमपाल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)
ओमपाल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 05 Apr 2022 11:21 AM IST
सार

पिछले एक वर्ष में गत्ता उद्योग में लगने वाले कच्चे माल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे गत्ता संचालकों के लिए पेपर की किल्लत हो रही है। अधिक दाम देने के बावजूद गत्ता संचालकों को पेपर नहीं मिल रहा है।

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Two dozen cardboard industries closed due to costly raw material in BBN
गत्ता(फाइल) - फोटो : istock

विस्तार

पेपर मिलों की कच्चे माल में लगातार बढ़ोतरी से बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ (बीबीएन) के दो दर्जन गत्ता उद्योग बंद हो गए हैं। इतने ही उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। गत्ता उद्योग चलाना अब संचालकों के लिए घाटे का सौदा बना हुआ है। अब गत्ता उद्योग संचालक सरकार से उद्योगों को बचाने की आस लगाए बैठे हैं। पिछले एक वर्ष में गत्ता उद्योग में लगने वाले कच्चे माल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे गत्ता संचालकों के लिए पेपर की किल्लत हो रही है। अधिक दाम देने के बावजूद गत्ता संचालकों को पेपर नहीं मिल रहा है। गत्ता उद्योगों पर यह संकट कोरोना काल से चला आ रहा है। उधर, गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि पेपर गत्ता उद्योग 100 फीसदी ईको फ्रेंडली हैं। हिमाचल में दस हजार लोगों को इन उद्योगों से रोजगार मिला है। गत्ता उद्योग की प्रगति बहुत जरूरी है। अभी तक इसके अलावा वस्तुओं के पैक करने के लिए बाजार में इससे सस्ता और टिकाऊ पैकेजिंग मैटीरियल बाजार में उपलब्ध नहीं है। 

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ये उद्योग हुए बंद
प्रदेश भर में 250 गत्ता उद्योग हैं, लेकिन लगातार कच्चे माल के दाम बढ़ने से शिव शक्ति पैकेजिंग, एसएस इंटर प्राइजेज, किरयानी पैकेजिंग, सत्यम पेकर्स, हितेश्वर पैकेजिंग, एएस पैकेजिंग, परफेक्ट पैकेजिंग, आरएस इंडस्ट्रीज, पेशोनेट समेत दो दर्जन उद्योग बंद हो गए हैं। इतने ही उद्योग वेंटिलेटर पर हैं। 
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किसमें कितनी फीसदी बढ़ोतरी हुई
बीते एक साल में क्राफ्ट पेपर में तीस फीसदी, डुप्लेक्स बोर्ड में 35, पीवीसी फिल्म में 60, एडहेसिव और स्टार्च में 50, स्टिचिंग वायर में 38 फीसदी, पीएनची गैस में 55 फीसदी, सुतली और प्लास्टिक में 25 फीसदी, मैन पावर में 25 फीसदी, बिजली में 20 और रखरखाव पर 40 फीसदी अतिरिक्त व्यय करना पड़ रहा है। प्रदेश भर में 250 गत्ता उद्योग हैं। इनमें प्रति माह 30 हजार टन पेपर (रद्दी) की खपत होती है।

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