Himachal News: हिमाचल में जून से शुरू होगी शराब की ट्रैक एंड ट्रेसिंग, तस्करी पर लगेगी लगाम
विश्व बैंक से पोषित इस योजना पर बीते करीब तीन वर्षों से ट्रायल चल रहा है। आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन के माध्यम से कंपनियों का चयन किया गया है।
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हिमाचल प्रदेश में जून 2023 से शराब की ट्रैक एंड ट्रेसिंग शुरू होगी। यूरोप और कोरिया से आधुनिक उपकरणों की खरीद हो रही है। कर एवं आबकारी विभाग का सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन तैयार है। सूबे के शराब कारखानों से लेकर स्टोर, ठेकों तक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। बोतलों पर लगे बार कोड को स्कैन कर कोई भी शराब की गुणवत्ता को जांच सकेगा। इस व्यवस्था के लागू होते ही नकली शराब का धंधा बंद हो जाएगा। विश्व बैंक से पोषित इस योजना पर बीते करीब तीन वर्षों से ट्रायल चल रहा है। आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन के माध्यम से कंपनियों का चयन किया गया है। प्रदेश की सभी डिस्टिलरी, बॉटलिंग प्लांट, होलसेल और गोडाउन में ट्रैक एंड ट्रेसिंग के लिए उपकरण लगाए जा रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि प्रदेश में स्थित सभी बॉटलिंग प्लांट व डिस्टिलरियों से बाहर आने वाली शराब की ऑनलाइन निगरानी के तंत्र के विकसित होने पर शराब तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने में आसानी होगी। बार कोड को स्कैन करने पर शराब को बनाने के वर्ष, बैच नंबर और कहां उसे बनाया गया है। इसकी जानकारी मिल जाएगी। कर एवं आबकारी विभाग सभी शराब कंपनियों, बॉटलिंग प्लांट, थोक विक्रेताओं के परिसरों में कैमरे भी लगा रहा है। कंप्यूटर सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। इस व्यवस्था के लागू होने पर शराब कारोबारी बिना बैच नंबर के शराब सप्लाई नहीं कर सकेंगे। हर बोतल का कंप्यूटर सिस्टम पर पंजीकरण होगा। मंडी जिले में जहरीली शराब पीने से हुई लोगों की मौत के बाद पूर्व सरकार ने शराब के ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम को लागू करने का फैसला लिया था। शराब बोतलों का ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम शुरू होने पर सरकार को मिलने वाले टैक्स की भी सही गणना हो सकेगी। इस प्रक्रिया से सरकार के राजस्व भी भी बढ़ोतरी होगी।