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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The elder brother became an officer in the Navy and the younger Indian Army, big Achievement

उपलब्धि: बड़ा भाई नौसेना तो छोटा भारतीय सेना में बना अफसर

Tue, 14 Dec 2021 10:58 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, टौणीदेवी (हमीरपुर)
संवाद न्यूज एजेंसी, टौणीदेवी (हमीरपुर) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 14 Dec 2021 10:58 AM IST
सार

सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की टपरे पंचायत के नौहगीं गांव से सेना में अफसर बने दो भाइयों की कामयाबी से क्षेत्र में खुशी की लहर है। दोनों बेटे जब अफसर बनकर घर लौटे तो मां की आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गईं और पिता गर्व महसूस कर रहे थे। 

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The elder brother became an officer in the Navy and the younger Indian Army, big Achievement
माता-पिता के साथ दोनों भाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दो सगे भाइयों ने एक साथ भारतीय सेना और नौसेना में शामिल होकर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की टपरे पंचायत के नौहगीं गांव से सेना में अफसर बने इन दो भाइयों की कामयाबी से क्षेत्र में खुशी की लहर है। दोनों बेटे जब अफसर बनकर घर लौटे तो मां की आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गईं और पिता गर्व महसूस कर रहे थे। बड़ा भाई रोहन भारद्वाज भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट बना है तो वहीं छोटा भाई राहुल भारद्वाज भारतीय में लेफ्टिनेंट बना है। पिता सुशील कुमार भी भारतीय नौसेना से ही एमसीपीओ-2 पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सुशील भारद्वाज वर्तमान में सरकारी स्कूल में बतौर लेक्चरर सेवाएं दे रहे हैं। दोनों भाई सैनिक स्कूल सुजानपुर के छात्र रहे हैं।

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एनडीए की परीक्षा को पास करने के बाद रोहन भारद्वाज इंडियन नेवल अकादमी और राहुल भारद्वाज ने यूपीएससी की परीक्षा देने के बाद नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे तथा इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से ट्रेनिंग पूरी की है। रोहन भारद्वाज को 27 नवंबर 2021 को इंडियन नेवल अकादमी में सब लेफ्टिनेंट के रैंक से नवाजा गया। जबकि राहुल भारद्वाज 11 दिसंबर 2021 को इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में ट्रेनिंग पूरी करके लेफ्टिनेंट बने हैं। रोहन और राहुल भारद्वाज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और रिश्तेदारों को दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता और चाचा भारतीय नौसेना में थे। तो बचपन से ही उनका सपना आर्मी में जाने का था और इसकी शुरुआत सैनिक स्कूल सुजानपुर से शुरू हुई। माता रेशमा देवी का कहना है कि खुशी को बयां नहीं कर सकतीं।

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