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शिमला: सुरेश भारद्वाज बोले- कृषि उत्पाद संगठन बनाने के लिए अपनी नीति बनाएगा सहकारिता विभाग

Tue, 04 Jan 2022 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 04 Jan 2022 05:00 AM IST
सार

सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि एक वर्ष में 100 एफपीओ का पंजीकरण कर 10 हजार किसानों तक लाभ पहुंचाएंगे। ब्याज सब्वेंशन योजना में प्राथमिक कृषि ऋण सभाओं को शामिल किया जाएगा। 

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Suresh Bhardwaj said that cooperative department will make its policy to form Agricultural Produce Organization
सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में कृषि उत्पाद संगठन बनाने को सहकारिता विभाग अपनी नीति बनाएगा। केंद्र सरकार की नीति में संशोधन कर मुख्यमंत्री कृषि कोष योजना भी प्रदेश में इससे लिंक की जाएगी। 100 किसानों के समूह की सोसायटी को वित्तीय सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाने और उपज का बाजार उपलब्ध करवाने और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने को सहकारिता विभाग यह नई पहल करने जा रहा है। सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि एक वर्ष में 100 एफपीओ का पंजीकरण कर 10 हजार किसानों तक लाभ पहुंचाएंगे। ब्याज सब्वेंशन योजना में प्राथमिक कृषि ऋण सभाओं को शामिल किया जाएगा। राज्य और जिला सहकारी बैंकों को सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट में लाने का प्रयास भी किया जाएगा। एफपीओ (कृषि उत्पाद संगठन) के माध्यम से बागवान स्वयं कोल्ड स्टोर और पैकेजिंग और ग्रेडिंग मशीनों को स्थापित कर सकेंगे।

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सुरेश भारद्वाज ने बताया कि कृषि भूमि उपजाने वाले नए संगठनों का निर्माण और उन्हें प्रोत्साहित करने को केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की है। योजना के तहत किसानों और बागवानों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें समृद्ध बनाया जाएगा। इसके लिए किसान उत्पादक संगठन बनाना होगा। केंद्र सरकार की योजना में प्रदेश में कुछ संशोधन कर इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री कृषि कोष योजना में छह लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। ऐसे में सहकारिता विभाग इस योजना को अपनी योजना से लिंक करने का प्रयास करेगा। इसका मामला कैबिनेट में लाया जाएगा। सोसायटियों को पंजीकृत कर किसान-बागवान कृषि विभाग की योजना का लाभ भी उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री कृषि कोष योजना के तहत कृषि उत्पादक संगठन को परियोजना लागत के ऊपर 30 प्रतिशत आर्थिक अनुदान मिलता है। इसकी अधिकतम सीमा 6 लाख रुपये है। 

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