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Shimla: मुसीबत बने 2500 लावारिस कुत्ते, बच्चों पर कर रहे हमले

Sat, 26 Nov 2022 03:30 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Nov 2022 03:30 PM IST
सार

 शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके मालरोड और रिज मैदान पर सुबह से लेकर देर रात तक लावारिस कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। 

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2500 stray dogs became trouble in shimla, attacking children
शिमला के मालरोड पर आपस में उलझता कुत्तों का झुंड - फोटो : संवाद

विस्तार

राजधानी में 2500 लावारिस कुत्ते शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। आए दिन यह लोगों को काट रहे हैं। स्कूली बच्चों पर यह ज्यादा हमलावर हो रहे हैं। हालत यह है कि हर माह शिमला शहर से कुत्तों के काटने के 40 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। नगर निगम राहत दिलाने के नाम पर सिर्फ इनकी नसबंदी तक सीमित है। साल 2006 से निगम लगातार इनकी नसबंदी कर रहा है लेकिन इनकी संख्या घटने की बजाय बढ़ती जा रही है। शहर के तकरीबन सभी वार्डों में लावारिस कुत्तों का आतंक है। लेकिन लोअर बाजार, सब्जी मंडी, मालरोड, विकासनगर, न्यू शिमला, खलीनी, कृष्णानगर, लक्कड़ बाजार, संजौली, कसुम्पटी, बालूगंज क्षेत्र में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके मालरोड और रिज मैदान पर सुबह से लेकर देर रात तक लावारिस कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। 

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   यह शहरवासियों के साथ सैलानियों को भी काट रहे हैं। स्कूली बच्चों पर इनके हमले बढ़े हैं। ऐसे में अभिभावकों को बंदरों के साथ साथ अब लावारिस कुत्तों से भी बच्चों को बचाना पड़ रहा है। हाल ही में विकासनगर में सात साल की बच्ची को कुत्ते ने नोच लिया था। न्यू शिमला में स्कूली बच्चे के चेहरे को लावारिस कुत्ते ने लहूलुहान कर दिया था। नगर निगम के वेटरनरी पब्लिक हेल्थ ऑफिसर डॉ. नीरज मोहन ने बताया कि जिन जगहों से लावारिस कुत्तों के काटने की शिकायतें आती हैं, वहां तुरंत टीमें भेजी जाती हैं। लोग नगर निगम की हेल्पलाइन सेवा 1916 पर शिकायत कर सकते हैं।
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16 साल में 10 हजार, हर साल 450 कुत्तों की नसबंदी
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार 16 साल में अब तक 10 हजार लावारिस कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। हर साल 450 कुत्तों की नसबंदी होती है। बावजूद इसके इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे निगम का तर्क है कि छोटे या बीमार कुत्तों की नसबंदी नहीं होती। इसमें जो कुत्ते नसबंदी से छूट जाते हैं, उनके कारण संख्या बढ़ रही है। निगम ने पकड़े गए कुत्तों के लिए बाग गांव के पास डॉग हट बनाया था लेकिन बाद में कोर्ट के आदेशों पर इसे बंद करना पड़ा।
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शिकायत पर होती है यह कार्रवाई
लावारिस कुत्ते के काटने की शिकायत मिलने पर निगम की टीम इसे पकड़ती है। इसे दस दिन तक पिंजरे में निगरानी में रखा जाता है। दावा है कि यदि कुत्ता पागल हो तो वह दस दिन में खुद मर जाता है। लेकिन यदि न मरे तो उसकी नसबंदी कर तीन चार दिन बाद वापस उसी जगह छोड़ना पड़ता है, जहां से इसे पकड़ा गया था।

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