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हिमाचल: चीन से कच्चे माल का संकट, महंगी हुईं दवाएं
Fri, 08 Oct 2021 12:07 PM IST
Krishan Singh
ओमपाल सिंह, अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
ओमपाल सिंह, अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 08 Oct 2021 12:07 PM IST
सार
कच्चे माल के दामों में 20 से 60 फीसदी उछाल आने से छोटे उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। भारत में 95 फीसदी कच्चा माल चीन से ही आता है। सप्लाई घटने से कच्चे माल के सप्लायर पहले से बुक किए ऑर्डर भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
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उद्योग(सांकेतिक)
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विस्तार
चीन में तीन दिन के लिए उद्योग बंद होने से भारत के फार्मा उद्योगों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। कच्चे माल के दामों में 20 से 60 फीसदी उछाल आने से छोटे उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। भारत में 95 फीसदी कच्चा माल चीन से ही आता है। सप्लाई घटने से कच्चे माल के सप्लायर पहले से बुक किए ऑर्डर भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
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वहीं जिन उद्योगपतियों ने दवा बनाने के लिए ऑर्डर लिए हैं, वे कच्चा माल बढ़े हुए दाम से पूरे नहीं कर पा रहे हैं। गौर हो कि चीन में बढ़ते प्रदूषण के चलते तीन दिन के लिए सभी उद्योग बंद कर दिए गए हैं। इससे देश के फार्मा उद्योग को कच्चा माल कम आ रहा है। रेट बढ़ाने के बावजूद छोटे उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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अभी तक 600 रुपये प्रति किलो तक मिलने वाले पैरासिटामोल का कच्चा माल अब 950 रुपये प्रति किलो हो गया है। पीवीपीके-30 के दाम 350 से एक हजार रुपये हो गए। ग्लिसरीन 65 से 250 रुपये प्रति किलो हो गई है। दर्द निवारक दवाई में लगने वाला कच्चा माल क्लोराजोक्साजॉन 750 से 950, एसिक्लोफिनेक के दाम 850 से बढ़कर 1150 रुपये हो गए हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के हिमाचल प्रदेश चैप्टर के उपाध्यक्ष सुमित सिंगला ने कहा कि देश में 11 हजार फार्मा उद्योग हैं, जिनमें तीन हजार उद्योग सरकार की अनदेखी के चलते बंद होने के कगार पर हैं।
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जिन उद्योगपतियों ने पुराने रेट पर ऑर्डर बुक किए हैं, उन्हें ऑर्डर उसके आधार पर भी नहीं मिल रहा है। उद्योगपतियों को सरकारी व निजी कंपनियों के ऑर्डर को बढ़े हुए दाम पर पूरे करने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने मुश्किल की इस घड़ी में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर फार्मा उद्योग बचाने के लिए शीघ्र ही नीति निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने प्रदेश के सभी फार्मा उद्योगों से एकजुट होने की अपील की है। सिंगला ने कहा कि केंद्र सरकार फार्मा उद्योग के लिए आर्थिक पैकेज का प्रावधान करे या जीएसटी की दर में कमी करें।