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Kullu: प्रतिभा सिंह बोलीं- अंतिम सांस तक प्रदेश की जनता के बारे में सोचते थे वीरभद्र सिंह
Sat, 12 Nov 2022 09:42 AM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 12 Nov 2022 09:42 AM IST
सार
प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह अंतिम सांस तक प्रदेश की जनता के बारे में सोचते थे। वीरभद्र सिंह के विकास की वजह से वह लोकसभा का उप चुनाव जीतीं।
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कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित अटल सदन में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि महिलाओं को कांग्रेस ने सम्मान दिया है। भाजपा को नैया डूबती नजर आ रही है। तभी भाजपा पीएम मोदी, अमित शाह, योगी को चुनाव में बुला रही है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह अंतिम सांस तक प्रदेश की जनता के बारे में सोचते थे। वीरभद्र सिंह के विकास की वजह से वह लोकसभा का उपचुनाव जीतीं। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। साथ ही कहा कि भाजपा ईवीएम के साथ गड़बड़ कर सकती है।
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मां-बेटे के हाथ में विरासत संभालने की चुनौती
प्रतिभा हिमाचल प्रदेश के पांच बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की पत्नी हैं। करीब चार दशक तक हिमाचल में कांग्रेस की कमान वीरभद्र के हाथ में रही। 2021 में उनके निधन के बाद ये कांग्रेस का पहला बड़ा चुनाव है। इस चुनाव में कांग्रेस की कमान वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह के पास है। प्रतिभा पर वीरभद्र की विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है। उनके साथ उनके बेटे विक्रमादित्य भी युवा कार्यकर्ताओं के साथ पूरे दमखम से लगे हुए हैं।
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शिमला ग्रामीण सीट से मौजूदा विधायक विक्रमादित्य के लिए भी पिता की विरासत के साथ उनकी सीट पर कब्जा बरकरार रखने की भी जिम्मेदारी है। 21 साल से भी ज्यादा समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह ने जिन विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व किया उनमें शिमला ग्रामीण भी शामिल है।
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वीरभद्र सिंह (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
इन सीटों से चुनाव लड़े थे वीरभद्र सिंह, जानिए अब यहां के समीकरण
1. जुब्बल-कोटखाई विधानसभा: 1983 में जब वीरभद्र सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त हुए उपचुनाव में वह जुब्बल कोटखाई सीट पर हुए उपचुनाव में विधायक बने थे। उन्होंने ठाकुर रामलाल की जगह ली थी। वीरभद्र सिंह इस सीट से दो बार विधायक चुने गए थे। पहली बार 1983 और फिर 1985 में। अभी इस सीट से रोहित ठाकुर विधायक हैं। रोहित कांग्रेस पार्टी से हैं। इनके दादा ठाकुर रामलाल दो बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।
2. रोहरू: इस सीट से वीरभद्र सिंह लगातार पांच बार विधायक चुने गए। पहली बार 1990 में यहां से वह चुनाव जीते थे। इसके बाद 1993, 1998, 2003 और फिर 2007 में यहां से विधायक चुने गए। इस बीच, 1993 से 1998 और फिर 2003 से 2007 तक वह मुख्यमंत्री भी रहे। 2017 में इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी मोहन लाल बरकता विधायक चुने गए थे। मोहन लाल इस बार भी कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। भाजपा ने उनके खिलाफ शशि बाला को उतारा है।
3. शिमला ग्रामीण: 2012 में वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2017 तक वह इस सीट का प्रतिनिधित्व करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री भी रहे। इस सीट से अभी वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह विधायक हैं। विक्रमादित्य एक बार फिर इस सीट से मैदान में हैं।
4. अर्की: 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र ने शिमाल ग्रामीण सीट अपने बेटे विक्रमादित्य के लिए छोड़ दी। उन्होंने अर्की सीट से चुनाव लड़ा। यहां से भी उन्हें जीत हासिल हुई थी। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में इस सीट से कांग्रेस के संजय अवस्थी जीते थे। कांग्रेस ने इस बार भी उन्हें यहां से टिकट दिया है। उनके खिलाफ भाजपा के गोविंद राम शर्मा मैदान में हैं।
1. जुब्बल-कोटखाई विधानसभा: 1983 में जब वीरभद्र सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त हुए उपचुनाव में वह जुब्बल कोटखाई सीट पर हुए उपचुनाव में विधायक बने थे। उन्होंने ठाकुर रामलाल की जगह ली थी। वीरभद्र सिंह इस सीट से दो बार विधायक चुने गए थे। पहली बार 1983 और फिर 1985 में। अभी इस सीट से रोहित ठाकुर विधायक हैं। रोहित कांग्रेस पार्टी से हैं। इनके दादा ठाकुर रामलाल दो बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।
2. रोहरू: इस सीट से वीरभद्र सिंह लगातार पांच बार विधायक चुने गए। पहली बार 1990 में यहां से वह चुनाव जीते थे। इसके बाद 1993, 1998, 2003 और फिर 2007 में यहां से विधायक चुने गए। इस बीच, 1993 से 1998 और फिर 2003 से 2007 तक वह मुख्यमंत्री भी रहे। 2017 में इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी मोहन लाल बरकता विधायक चुने गए थे। मोहन लाल इस बार भी कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। भाजपा ने उनके खिलाफ शशि बाला को उतारा है।
3. शिमला ग्रामीण: 2012 में वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2017 तक वह इस सीट का प्रतिनिधित्व करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री भी रहे। इस सीट से अभी वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह विधायक हैं। विक्रमादित्य एक बार फिर इस सीट से मैदान में हैं।
4. अर्की: 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र ने शिमाल ग्रामीण सीट अपने बेटे विक्रमादित्य के लिए छोड़ दी। उन्होंने अर्की सीट से चुनाव लड़ा। यहां से भी उन्हें जीत हासिल हुई थी। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में इस सीट से कांग्रेस के संजय अवस्थी जीते थे। कांग्रेस ने इस बार भी उन्हें यहां से टिकट दिया है। उनके खिलाफ भाजपा के गोविंद राम शर्मा मैदान में हैं।